बस्ती। हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जन्मजयंती पर उनकी जन्मभूमि बस्ती में उनके नाम पर हिंदी विश्वविद्यालय की मांग फिर उठी है। शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दुर्गादत्त पांडेय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की। कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल आचार्य शुक्ल की स्मृति को संरक्षित करने तक सीमित न रहकर हिंदी के साथ अवधी, भोजपुरी, नेपाली और पाली जैसी भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और शोध का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने चिंतन, लेखन और आलोचनात्मक दृष्टि से हिंदी साहित्य को नई दिशा दी। हिंदी आलोचना के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उन्हें हिंदी साहित्य के प्रमुख आलोचकों में स्थान प्राप्त है। बस्ती की धरती से उनका जुड़ाव जिले के लिए गौरव का विषय है। ऐसे में उनकी जन्मभूमि में अब तक उनके नाम पर हिंदी विश्वविद्यालय स्थापित नहीं होने को दुर्गादत्त पांडेय ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर पूर्व में भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से भी इस संबंध में अनुरोध किया गया है। उनका कहना है कि बस्ती में विश्वविद्यालय की स्थापना होने से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जिले को नई पहचान मिलेगी। आचार्य शुक्ल के नाम पर हिंदी विश्वविद्यालय इस क्षेत्र की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय में हिंदी के साथ अवधी, भोजपुरी, नेपाली और पाली जैसी भाषाओं के साहित्य, लोक संस्कृति और भाषाई विरासत पर शोध की व्यवस्था की जा सकती है। इससे पूर्वांचल की समृद्ध भाषाई परंपराओं के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उन्हें पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
पांडेय ने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जन्मभूमि को साहित्यिक गौरव के अनुरूप पहचान दिलाना सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके नाम पर हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना उनकी स्मृति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।