बस्ती। मंडल के 102 राइस मिलर्स पर सरकार का पिछले चार साल से 27 करोड़ 10
लाख रुपए बकाया चल रहा है। सरकार ने इन मिलों को चावल बनाने के लिए धान
कूटने के लिए दिया था, जिसे मिलरों ने न गोदामों में जमा कराया और न धनराशि
को ही चुकता किया।
सरकार बकाया वसूलने के लिए सारे जतन कर चुकी
है, यहां तक आरसी भी जारी हो चुकी है, बावजूद अपेक्षित वसूली नहीं हो सकी।
अब सरकार ने बकाए की वसूली के लिए उन्हीं राइस मिलरों को धान खरीदने के लिए
कमीशन एजेंट बनाने का निर्णय लिया है, जिन्हें वह डिफाल्टर घोषित कर चुकी
है।
आरएफसी रवि कुमार का कहना है कि इस व्यवस्था से सरकार को बकाए
के रूप में साढ़े दस करोड़ से अधिक रकम मिलने की संभावना है। सरकार के इस
निर्णय का राइस मिलर्स एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष जेपी सिंह ने स्वागत किया
है। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ बकाए की वसूली होगी, अलबत्ता मिलों की
आर्थिक स्थित भी मजबूत हो सकेगी।
23 नवंबर को जारी आदेश में खाद्य
एवं रसद आयुक्त अजय चौहान ने सरकार के इस निर्णय की जानकारी दी है। आरएफसी
से कहा है कि वह वर्ष 2011-2012 एवं 2012-13 का जिन राइस मिलर्स पर सरकारी
चावल बकाया है, उन्हें भी कमीशन एजेंट के रूप में नियुक्ति करें।
बशर्ते
उनसे बकाए का 25 फीसदी वसूल किया जाए और उनसे इस आशय का शपथ पत्र लिया जाए
कि वे शेष बकाए की रकम निर्धारित अवधि में तीन समान किश्तों में कर देंगे।
शपथ पत्र के सत्यापन करने की जिम्मेदारी आरएफसी की होगी।
बकाया
देने की अंतिम तिथि 30 सिंतबर 2017 निर्धारित है। साथ ही यह भी शर्त है कि
कमीशन के रूप में जो धान राइस मिलर्स करेंगे, उसकी कुटाई उनसे नहीं कराई
जाएगी। कुटाई का निर्धारण आरएफसी करेंगे।
बताया गया कि यह निर्णय
राइस मिलर्स एसोसिएशन के विभिन्न संगठनों के आवेदन पर लिया गया। उन मिलों
को भी कमीशन एजेंट बनाए जाने की बात कही गई जिन्होंने बकाए का एक भी पैसा
अदा नहीं किया है।
कमीशन एजेंट को धान खरीद के रूप में सरकार जो
ढाई फीसदी कमीशन देगी, उसमें से मिलरों को दो फीसदी बकाए के रूप में राज्य
सरकार के खाते में जमा करना होगा।