संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में डीएपी को लेकर खींचतान कम होने का नाम ले रही है। कई समितियों पर शनिवार को चार-चार सौ बोरी डीएपी पहुंची। मगर किसानों में डीएपी न मिलने का असंतोष बढ़ता जा रहा है। आधे से अधिक समितियों पर एक बोरी भी डीएपी नहीं है। जहां ट्रक डीएम पी लेकर पहुंच रहे हैं, वहां किसानों की भीड़ लग जा रही है। उधर, विभाग का दावा है कि पिछले वर्ष के नवंबर माह के चार हजार मीट्रिक टन के वितरण के सापेक्ष अब तक 42 सौ मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है। इस सीजन में आठ हजार मीट्रिक टन फास्फेटिक उर्वकर का वितरण हुआ है।
इन सबके बीच की गई पड़ताल में पाया गया कि एक ही ब्रांड इफको के लिए किसानों में सबसे ज्यादा होड़ है। जिले की निजी दुकानों पर दूसरे ब्रांड की भरपूर डीएपी और उसके अन्य विकल्प उपलब्ध है। मगर किसान को सिर्फ इफको चाहिए। बहादुरपुर ब्लाॅक के नरायनपुर निवासी किसान राम हरीश चौधरी बताते हैं कि इफ्को सरकारी और काफी पुरानी कंपनी है। इसलिए हम सबको विश्वास है कि इसमें कमियागीरी नहीं होगी।
उर्वरक के लाइसेंसी विक्रेता इंद्रजीत सिंह बताते हैं कि अब विभाग का इतना नियंत्रण है कि कोई नकली डीएपी नहीं बेच सकता है, लेकिन किसानों की पहली प्राथमिकता एक ही ब्रांड पर होने की वजह से समस्या है।
नमी बचाने को जोर पर बुआई : धान काटकर खाली हुए खेतों में अभी गेहूं की बुआई के लिए पर्याप्त नमी है। इसलिए किसान तेजी से गेहूं की बुआई करने में जुटे हैं। यही वजह है कि डीएपी व अन्य उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ी है। जिले में इस बार रबी सीजन में 1.71 लाख हेक्टेयर में बोआई का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 1.41 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल बोआई होगी। जिला कृषि अधिकारी डाॅ. बीआर मौर्य ने बताया कि किसान सिंगल सुपर फास्फेट और एनपीके भी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इससे कम डीएपी की ही जरूरत होगी। नवंबर, दिसंबर और जनवरी मिलाकर शासन स्तर से आपूर्ति की समयसारिणी तय की गई है।