बस्ती। बुवाई के समय डीएपी उपलब्ध कराने के लिए महकमा सक्रिय हो गया है। शुक्रवार से समितियों पर खाद भेजने में तेजी आई है। जिले की 126 सहकारी समितियों में से 50 समितियों में दीपावली के पहले ही खाद उपलब्ध हो गई थी।
इधर, छुट्टी की वजह से खाद नहीं भेजी जा रही थी। शुक्रवार से इसमें तेजी आई है। सहकारिता का विभाग का दावा है कि दो से तीन दिन में सभी समितियों में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाएगी। निजी क्षेत्र की दुकानों पर कृषि विभाग ने 3044 एमटी डीएपी पहले से उपलब्ध करा चुका है। शुक्रवार से इसका वितरण भी शुरू करा दिया गया है। जिन समितियों और दुकानों पर डीएपी की उपलब्धता है वहां किसानों को फार्मर रजिस्ट्री एवं आधार कार्ड पर खाद वितरित किया जा रहा है।
एआर कोआपरेटिव अमित श्रीवास्तव ने बताया कि लगभग 20 समितियों पर डीएपी वितरण आज से शुरू हो गया है। किसानों को पीओएस मशीन से खतौनी के हिसाब से ही डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी। मानक से अधिक खाद किसी को नहीं दी जाएगी। किसान अपना फार्मर रजिस्ट्री या खतौनी लेकर पहुंचें, उन्हें खाद उपलब्ध होगी।
समितियों को मिल रही 15 लाख पूंजी : खाद का व्यवसाय करने के लिए शासन ने सहकारी समितियों की पूंजी बढ़ा दी है। सहकारिता बैंक के माध्यम से रबी सीजन में सहकारी समितियों ब्याज मुक्त 15 लाख तक की पूंजी दी जा रही है। पिछले खरीफ सीजन में सहकारिता बैंक के जरिये 10 लाख तक की पूंजी दी गई थी।
पूंजी बढ़ने से समितियों के आमदनी का ग्राफ इस बार बढ़ जाएगा। बैंक से लिए गए धन से उर्वरक खरीदकर बेचने के बाद बैंक का रुपये वापस करने होते हैं। इसके बाद अगली किस्त के लिए डिमांड स्वीकार होती है।
समितियों का सदस्य बनने पर किसानों को फायदा : सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इस बार समितियों पर किसानों को स्थाई सदस्यता दिलाई जा रही है। प्रत्येक किसान से 266 रुपये जमा कराने के बाद उन्हें सहकारिता क्षेत्र का शेयर होल्डर बनाया जा रहा है। इसके अलावा पासबुक भी दिया जा रहा है। इसी पासबुक पर किसानों को सीजन में खाद भी उपलब्ध होगी। जरूरत पड़ने पर दस हजार तक का ऋण भी मुहैया कराया जाएगा।
एआर कोआपरेटिव अमित श्रीवास्तव ने बताया कि सभी किसान 31 अक्तूबर तक समितियों पर पहुंचकर अपनी सदस्यता ग्रहण करके पासबुक हासिल कर लें।