भीषण कटान से टकटकवा के अस्तित्व पर खतरा
दुबौलिया (बस्ती)। ब्लॉक क्षेत्र के गौरा-सैफाबाद तटबंध के पास हो रही कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। बाढ़ खंड चार दिन से दिन-रात तटबंध पर बनाए गए रिंग बांध की मरम्मत करा रहा है, लेकिन कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। बृहस्पतिवार की सुबह करीब दस बजे से टकटकवा स्थित रिंग बांध के पास भीषण कटान शुरू हो गई।
कटान रोकने के लिए लगाई गईं बोरियां व परकोपाइन देखते-देखते नदी में समा गए। इस घटना को बाढ़ खंड भले ही लांचिंग मान रहा हो, लेकिन इसके बाद नदी की धारा रिंग बांध को छूने लगी है। मुख्यधारा गौरा-सैफाबाद से महज कुछ मीटर दूरी पर बह रही है। अति संवेदनशील तटबंध कटरिया-चांदपुर के पास नदी खजांचीपुर, विशुनदासपुर की दलित बस्ती, कटरिया, बंजरिया आदि गांवों के पास खेती की जमीनों पर कटान कर रही है। इस तटंबध पर पानी का दबाव सामान्य बना हुआ है।
टकटकवा मजरे की सुरक्षा के लिए बनाए गए रिंग बांध के पास से मिट्टी भरी बोरियों, झाड़ियों व परकोपाइन की मदद से कटान रोकने का प्रयास चल रहा है, लेकिन यह थमने का नाम नहीं ले रही है। भीषण कटान देख ग्रामीण भयभीत है। एकजुट होकर ग्रामीणों ने बाढ़ खंड के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीण शीला, प्रहलाद, तिलकराम, चईतु, फूलेसरा, रेखा, राजबहादुर, रामजगत, उमाकांत आदि ने बताया कि बाढ़ खंड मनमानी कर रहा है। मिट्टी भरी बोरियां, झाड़ व परकोपाइन से कटान रोक रहा है। इससे उनके मजरे के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाढ़ खंड बोल्डर की जगह ईंट का रोड़ा डाल रहा है जो कटान रोकने के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। बाढ़ खंड के आश्वासन पर ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त किया। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार जलस्तर खतरे के निशान 92.73 मीटर से 91.52 मीटर दर्ज किया गया।
मरम्मत कार्यों में अनियमितता का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगया कि टकटकवा के पास कटान रोकने के कार्यों में अनियमितता बरती जा रही है। आधी मिट्टी भरी बोरियों का उपयोग कटान रोकने के लिए किया जा रहा है। ऊपर से ये बारियां ट्राली से नीचे उतारते समय फट जा रही है। बचाव कार्य बाढ़ खंड जिम्मेदारों की मौजूदगी में हो रहा है। बुधवार को अधिशासी अभियंता ने निरीक्षण में आधी बोरी मिट्टी मिलने पर ठेकेदार को हिदायत दी थी।
टकटकवा निवासी छोड़ने लगे घर
ग्राम पंचायत बैरागल का टकटकवा मजरा भी कटान की जद में आ गया। मजरे की सुरक्षा के लिए बनाए गए रिंग बांध के पास नदी की धारा पहुंच गई है। बाढ़ खंड प्रयास कर रहा है, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहा है। नदी की धारा करीब देख रामजगत गृहस्थी का सामान समेटने लगे। उन्होंने बताया कि बैरागल के पास एक घर कमरा किराए पर लिया है। जहां सामान रखेंगे। घर का सामान तटबंध पर ले जा रहे बबलू बताते हैं कि अब उम्मीद छोड़ दी है। अब तो सरयू ही कमाल कर सकती हैं। गांव के चैतू, राम सिंह, राजबहादुर जुल्ला आदि गृहस्थी का सामान समेटकर सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे।