बस्ती। रसोई गैस सिलिंडर की किल्लत और अब गहरा रही है। वितरण व्यवस्था पर विभाग का नियंत्रण नहीं है। बुकिंग कराने के बाद भी गैस उपभोक्ता इधर-उधर सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं। पूर्ति विभाग कार्यालय से लेकर कलक्ट्रेट के प्रशासनिक अफसरों के कार्यालय में गैस के फरियादी पासबुक और बुकिंग नंबर लेकर भटक रहे हैं। स्थायी समाधान किसी के पास नहीं है।
प्रशासनिक अफसर फरियाद सुनने के बाद डीएसओ के पास भेज रहे हैं। डीएसओ का दो टूक जवाब नवीन बाबू से मिलिए। नवीन बाबू मोबाइल पर सभी फरियादियों से बुकिंग नंबर के साथ पूरा विवरण मांग रहे हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को आश्वासन देकर लौटा रहे हैं।
विभागीय लोग खुद यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि एजेंसी कर्मचारियों ने फोन उठाना बंद कर दिया है। दिन भर में भेजे गए डिलीवरी से संबंधित कुछ ही मामलों का निस्तारण एजेंसियों से हो रहा है। शेष मामलों की अनदेखी कर दी जा रही है।
बुधवार को स्टेशन रोड स्थित एजेंसी पर उपभोक्ताओं की लंबी कतार देखी गई। यहां उपभोक्ता सुनील कुमार ने बताया कि एजेंसी कर्मचारी उनका पासबुक अपडेट करने को तैयार नहीं हो रहे हैं। भारी भीड़ को चीरकर किसी तरह काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें वापस कर दिया गया।
इस एजेंसी पर उपभोक्ताओं के साथ पूरी तरह मनमानी की जा रही है। दूसरे उपभोक्ता राम प्रकाश ने बताया कि एजेंसी कर्मचारी रात में यहां रूककर अपने हिसाब से सिलिंडरों की डिलीवरी का कागज तैयार कर ले रहे हैं।
यह वास्तविक उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है। विभाग एवं प्रशासन का कोई अंकुश भी नहीं है। इसीलिए उपभोक्ताओं के साथ खूब मनमानी हो रही है। आपूर्ति के हिसाब से यदि पारदर्शी ढंग से वितरण हो इतनी समस्या नहीं आएगी।
सहालग के सीजन हाेने से उपभोक्ता परेशान : अप्रैल में लगन शुरू होने वाली है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के होटल और मैरिज हॉल लगभग बुक हो चुके हैं। इस बार मैरिज हॉल और होटल कारोबारियों ने कॉमर्शियल सिलिंडर का इंतजाम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि आयोजक खुद रसोई गैस का इंतजाम करके आए। एजेंसियों पर कॉमर्शियल सिलिंडर मिलना बंद हो गया है।
ऐसे में लोग घरेलू सिलिंडर के लिए जुगाड़ लगाते फिर रहे हैं। जिन्हें सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है वह लोग काफी परेशान हैं। रविंद्र कुमार बताते हैं कि सिलिंडर के लिए विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा चुके हैं। लोग सिर्फ अधिकारियों को फोन कर दे रहे हैं। वहां पहुंचने पर उनके बात का कोई असर नहीं दिख रहा है।