जी- 20 के आयोजन में तकनीकी व्यवस्था संभालने में निभाई थी मिका
- इंजीनियरिंग के बाद गूगल, बिग 4 टॉप कंसल्टिंग फर्म डेलोइट में भी काम कर चुके हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। साइबर सुरक्षा के माहिर बस्ती के शुभम शुक्ल का डंका अब लंदन में बज रहा है। 23 वर्ष की आयु में उन्होंने सफलता की ऊंची उड़ान भरी है। लंदन की टॉप इंवेंस्टमेंट (निवेश) बैकिंग फर्म में बतौर इंजीनियर शुभम साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के रूप में अपनी पहचान बनाकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
बंकाटिया गांव में जन्मे शुभम शुक्ला लंदन की एक बड़ी निवेश बैंकिंग फर्म में भारी भरकम पैकेज पर साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं। गृह जनपद में परिवार के बीच पहुंचे शुभम से मिलकर उनके परिवार और शुभचिंतक गदगद हो रहे हैं। शुभम के पिता राम भवन शुक्ल सामान्य किसान होने के साथ-साथ दलीय नेता भी हैं। शुभम की पढ़ाई गांव के पास एक सरकारी स्कूल से शुरू हुई।
बाद में पिता उन्हें बस्ती शहर ले आए। पढ़ाई के दौरान ही वह शहर के इंडियन पब्लिक स्कूल में अपनी मेधा की बदौलत चर्चा में रहा करते थे। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने दिल्ली के एक टियर कॉलेज से इंजीनियरिंग की। इसके बाद उन्होंने गूगल, बिग 4 टॉप कंसल्टिंग फर्म डेलोइट में काम किया। यहां से उड़ान भरी तो लंदन पहुंच गए। इसके अलावा शुभम भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के लिए बाहरी तकनीकी सलाहकार के रूप में काम करते हैं। जी- 20 आयोजन के तकनीकी व्यवस्था को संचालित करने में उनकी सक्रिय भूमिका रही। उनका कहना है कि इच्छा शक्ति मजबूत हो तो छोटी जगह पर रहकर भी बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। हमने यह कभी नहीं सोचा कि मेरा ताल्लुकात पिछड़े अंचल से है। मन से पढ़ाई की और बड़े सपने की ओर कदम बढ़ाते रहे।
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यूथ आईकान अवार्ड से हो चुके हैं सम्मानित
शुभम ने 2021 में कोविड महामारी के दौरान कमाल कर दिया था। नौकरी खो चुके नीली कॉलर के लोगों के लिए जॉब सर्च प्लेटफॉर्म बनाकर पूरी दुनिया को दिखाया। उनके बनाए हुए एप को व्यापक रूप से डाउनलोड कर लोगों ने नौकरी के उद्देश्य की पूर्ति की। इसके लिए उन्हें यूथ आईकान अवार्ड से सम्मानित किया गया।
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माटी से जुड़े रहने में ज्यादा दिलचस्पी
देश- दुनिया में पहचान बनाने वाले शुभम की सबसे ज्यादा दिलचस्पी अपनी माटी से जुड़े रहने की है। उन्होंने अपने गृह जनपद के आर्थिक रूप से कमजोर 6 छात्रों के पढ़ाई का जिम्मा अपनी तनख्वाह से उठाया है। इसमें से चार नोएडा के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ रहे हैं, जिनका पूरा खर्च शुभम वहन करते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने जिले में वृद्धाश्रम खोलने का सपना संजोए हैं।