एक रुपये भेजकर दस-बीस हजार रुपये भेजने का करते हैं दावा
रुपये वापस करवाने के चक्कर में खंगाल रहे हैं खाता
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आपके बैंक खाते में गलती से रुपये चले गए हैं, आप देखिए मैसेज गया होगा। हो सकता है कि वह ऐसा भी कहें कि आपके खाते में रुपये भेज रहा हूं, वापस कर दीजिएगा। कोई ऐसा फोन करे तो सावधान हो जाइए। यह साइबर अपराधियों के फ्राड का नया तरीका है। साइबर अपराधी ऐसे मैसेज भेजकर झांसे में लेते हैं और बिना रुपये भेजे अपने खाते में रकम मंगवा लेते हैं। कई लोगों के साथ हाल के दिनों में इस तरह के फ्राड हो चुके हैं।
जानकारों का कहना है कि साइबर अपराधी लोगों को उलझाने के लिए नए-नए तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें यह नया तरीका सामने आया है। जालसाज फर्जी मैसेज भेजते हैं कि आपके खाते में रुपये क्रेडिट कर दिए गए हैं। अगले को मैसेज देखकर यकीन हो जाता है कि उसके खाते में वाकई रुपये आ गए होंगे। जबकि वह मैसेज फर्जी होता है। साइबर विशेषज्ञ शैलेश श्रीवास्तव बताते हैं कि ऐसे कॉल और मैसेज से सावधान रहने की जरूरत है।
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केस एक
नगर बाजार निवासी राम गोपाल के पास एक व्यक्ति ने तीन दिन पहले कॉल कर कहा कि पहचाने नहीं, हम तुम्हारी गुड़िया दीदी के हसबैंड बोल रहे हैं। हमें एक व्यक्ति से रुपये लेना है अपना फोन-पे नंबर दे दो, उसमें 25 हजार रुपये भेजवा रहा हूं, बाद में हमें भेज देना। इसने नंबर बता दिया तो उसने एक रुपये भेज दिया। मैसेज आने के बाद फिर बोला कि देखो अब 25 हजार का मैसेज गया होगा। मैसेज बाक्स में वाकई ऐसा मैसेज आया था। मगर रुपये सिर्फ एक आए थे। कुछ देर बाद उसने फिर कॉल कर कहा कि उसमें से पांच हजार रुपये हमें भेज दो, बाकी बाद में दे देना। हालांकि राम गोपाल को पता चल गया था कि उसके साथ फ्राड हो रहा है तो उसने फोन काट दिया।
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केस दो
गांधीनगर निवासी अरविंद श्रीवास्तव के पास 17 सितंबर को फोन आया कि वह रायबरेली से अनुराग बोल रहा है। आपके खाते में गलती से 15 हजार रुपये चला गया है। इसका आपके पास मैसेज गया होगा। जल्दी से रुपये वापस भेज दीजिए। अरविंद ने मैसेज बॉक्स चेक किया तो वाकई एक मैसेज आया था कि आपके खाते में 15 हजार रुपये क्रेडिट कर लिए गए हैं। यकीन हो जाने पर अरविंद श्रीवास्तव ने कथित अनुराग के बताए नंबर पर 15 हजार रुपये भेज दिए। तीन दिन बाद जब बैंक से रूटीन में करेंट अकाउंट बैलेंस का मैसेज आया तो 15 हजार रुपये कम बताने लगा। हैरानी होने पर अरविंद ने नेट बैंकिंग के जरिए अपना ट्रांजेक्शन देखा तो पैरों तले जमीन सरक गई। पता चला कि उनके खाते में रुपये आए ही नहीं थे। ध्यान से देखे तो मैसेज बैंक का नहीं, बल्कि फर्जी नंबर से आया था।
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यह सावधानी बरतें
- अपना यूपीआई नंबर अनजान व्यक्ति को न दें।
- कोई कितना भी कहे कि गलती से रुपये चला गया है, मगर यकीन न करें।
- अगर लगे कि वाकई रुपये आ गए हैं तो ऑनलाइन वापस करने के बजाए बुलाकर हाथ में दें।
- रुपये आने की जानकारी होने पर जरूरी लगे तो अकाउंट बैलेंस चेक करें।
- एसएमएस आने की कोई कहे तो बैंक डिटेल बिना देखे यकीन न करें।