दावा एक एकड़ में दस क्विंटल धान का, फसल 10 करीब फीसदी
किसान बोले, लगाई गई पूंजी भी डूब जाएगी, धान की बालियों में 90 फीसदी तक पइया
चंगेरवा व गंगिया कोहल गांव के करीब तीन सौ एकड़ में क्षेत्र में रोपा गया था 6633 धान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कंपनी द्वारा एक एकड़ में दस क्विंटल धान के उत्पादन के दावे को सच मानकर चंगेरवा व गंगियाकोहल के कई किसानों ने करीब तीन सौ एकड़ में 6633 एजेड धान रोपा। अब जब फसल तैयार हुई तो किसानों के पांव के नीचे की जमीन सरक गई। कारण कि फसल पूरी तरह खराब है, मात्र दस फीसदी बालियां ठीक है शेष फसल पइया।
कुछ समय पूर्व धान की लहलहाती फसल देख किसानों की बांछे खिल गई थी। अब जब फसल पक कर तैयार हुई तो उसमें से नब्बे प्रतिशत फसल पइया है। किसान हर्रेंद्र सिंह, सुभाष सिंह, महेंद्र सिंह, रामजीत सिंह, शंकर चौरसिया, झिनकान चौधरी आदि ने कहा कि कंपनी की ओर से जो बीज एजेंसी से मिला था वह गुणवत्ताविहीन था। इसे खरीदते समय एजेंसी के प्रोपराइटर ने कहा था कि प्रति एकड़ दस क्विंटल उपज होगी, मगर अब लग रहा है कि लगाई पूंजी भी डूब गई। खेत में जब यह खड़ी थी और दाने नहीं आए थे तो लग रहा था कि शायद इस बाद अच्छा उत्पादन मिल जाए। इसकी शिकायत जब की गई तो कंपनी की तकनीकी टीम तीन बार यहां आकर निरीक्षण किया था। इन लोगों ने कहा था कि यह सही है कि फसल चौपट हो गई है और कंपनी इसका मुआवजा देगी।
जिला कृषि अधिकारी संजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसी ही शिकायत पहले रामनगर व गनेशपुर क्षेत्र के किसानों ने की थी। अब चंगरेवा व गंगियाकोहल में भी यही स्थिति है। इसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि कंपनी अथवा डीलर ने धोखा किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उसे ब्लैकलिस्टेड भी किया जाएगा। किसानों से ठगी का यह मामला गंभीर है।
बीज की गुणवत्ता के कारण आती है समस्या
कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. प्रेमशंकर ने बताया कि पुराने व खराब गुणवत्ता के बीज की बुवाई करने पर बालियों में दाने कम या कई बार पड़ते ही नहीं हैं। धान में लगने वाले तना छेदक कीटों के कारण भी ऐसा होता है। यह तो फसल की जांच के बाद ही पता चलेगा कि आखिर कारण क्या है।