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फिटनेस को नजरअंदाज कर चला रहे वाहन

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डग्गामार वाहन। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। 
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लखनऊ में बृहस्पतिवार को सिटी बस की ब्रेक फेल होने से हुए हादसे की तरह यहां भी दुर्घटना हो सकती है। पुलिस के मोटरयान सेक्शन की टेक्निकल टीम की जांच में हादसे की वजह बस और ड्राइवर का अनफिट होना बताया गया है। चालक की मानसिक हालत ऐसी नहीं थी कि भीड़भाड़ वाले एरिया में वह सेफ ड्राइविंग कर सकता। 
फरवरी में ही तीन दिन के अंतराल पर एसपी संकल्प शर्मा और सीओ कलवारी अरविंद कुमार वर्मा की गाड़ी हादसे का शिकार हो गई। दोनों कारें फिट भी थीं और ड्राइवर भी अलर्ट थे लेकिन दूसरों को बचाने में हादसा नहीं रोका जा सका। बस्ती फोरलेन हो या लुंबिनी-दुद्धी मार्ग अथवा कस्बा आएदिन भयानक हादसे सामने आते हैं। इनसे सीख लेकर सुधार की जगह लोग ऐसे फर्राटे भरते हैं, जिसे देखकर किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाए। 
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स्कूल वाहन चालक भी कलर ब्लाइंड 
नवंबर 17 में यातायात सुरक्षा माह के दौरान परिवहन विभाग ने स्कूल वाहन के चालकों की फिटनेस जांचने के लिए कैंप लगाया था, जिसमें पांच ड्राइवरों को कलर ब्लाइंडनेस का शिकार पाया गया था। इसके असर से ड्राइवर लाल-नीली अथवा पीली बत्ती नहीं पहचान पाता। 

झपकी में सबसे ज्यादा हादसे 
लंबी दूरी की यात्रा के दौरान झपकी आना सबसे ज्यादा खतरनाक है। हादसे इसी तरह की लापरवाही या अनदेखी से अक्सर होते देखे जाते हैं। इसमें ड्राइवर को दो-चार सेकेंड की झपकी आती है और कई परिवारों का सफाया होते देर नहीं लगती। 

चक्कर पूरा करने में जान के लाले 
महसों के निवासी आत्मा प्रकाश लखनऊ-बस्ती एक्सप्रेस सेवा की मिनी बस ड्राइविंग करते हैं। इनका कहना है कि मालिक की तरफ से चक्कर पूरा करने का दबाव रहता है। देर हो जाने पर खरी-खोटी सुननी पड़ती है। लोकल रोड पर भी हाल ऐसा ही है। डुमरियागंज, बांसी, मेंहदावल, कलवारी, महुली, हर्रैश, टिनिच, गौर रोड पर ऑटो और टैक्सियों के बार-बार चक्कर पूरा करने का दबाव गलतियां करने पर मजबूर कर रहा है। 

अनवरत चलती है जांच : आरटीओ 
संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. आरके विश्वकर्मा का कहना है कि वाहन स्वामियों और चालकों को इसे लेकर खुद संवेदनशील होना चाहिए। क्योंकि यह ऐसा विषय है, जिसमें खुद की जान दांव पर होती है। रही बात चेकिंग और कार्रवाई की, वह अनवरत चलती रहती है। 
अनुबंधित बसों और टैक्सियों में गोलमाल 
फिटनेस की समस्या सिर्फ निजी बसों-ट्रकों के साथ नहीं है, बल्कि कई निगम की अनुबंधित बसों का बाहर से भले रंग-रोगन दिखे लेकिन अंदर बिगड़ी मशीन होती है। डेंट-पेंट से चमकाई गाड़ी भी फोरलेन पर लग्जरी को ओवरटेक करने लगती है। क्षमता से ज्यादा स्पीड और कमजोर ब्रेक सिस्टम की वजह से वाहन बेकाबू होकर किसको ठोंक दें, कहना मुश्किल है। 

नियम सख्त, जुर्माना बढ़ा, फिर भी जस का तस 
फिटनेस जांच समय पर न कराने वालों पर कार्रवाई का नियम सख्त कर दिया गया है। अब बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के रोड पर मिलने पर जुर्माना देना होगा। यह जुर्माना 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वसूला जाएगा। केंद्र सरकार की तरफ से 29 दिसंबर 2017 से लागू नई शर्त के तहत सौ से ज्यादा वाहनों पर कार्रवाई की जा चुकी है। 
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स्कूल वाहन चालकों को निर्देश 
स्कूल वाहन के ड्राइवर एवं कंडक्टर की भी फिटनेस जांच हो। 
प्रबंधक एवं प्राचार्य ड्राइवर के चरित्र की पुष्टि कर लें। 
शराब पीया ड्राइवर मिला तो स्कूल पर कार्रवाई की जाएगी। 
अग्नि शमन यंत्र तथा डोर लाूक की सुविधा जरूरी, सीसीकैमरा भी लगाएँ। 
12 साल से पुराने वाहन स्कूल के लिए नहीं होंगे संचालित। 
पांच साल या इससे ज्यादा अनुभवी ड्राइवर को ही गाड़ी चलाने के लिए रखें। 

नए एक्ट में भारी पड़ेगी अनदेखी 
डीआईजी आरके साहू का कहना है कि मोटर व्हिकल संशोधन बिल को मंजूरी मिलने के बाद ट्रैफिक नियमों की अनदेखी ज्यादा भारी पड़ेगी। एक्ट में बदलाव करके ट्रैफिक के लिए बिना लाइसेंस के वाहन चलाते पकड़े जाने, स्पीड तय सीमा से ज्यादा होने, फिटनेस की अनदेखी जैसी मूल बातें नजरअंदाज करना भारी पड़ेगा। 
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