बस्ती। अदालत से सामान रिलीज करने का आदेश लेकर जब थाने पहुंचें और थानेदार हाथ खड़ा कर दे तो हैरान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यहां दुर्व्यवस्था ही है। जिले के 16 थानों के परिसर में ऐसे तमाम सबूत और वारदात में प्रयुक्त असलहे जंग खा रहे हैं। नियमानुसार निस्तारण में देर होने से यह समस्या विकराल होती गई।
किसी थाने में स्प्रिट से भरे ड्रम लुढ़काए गए हैं तो कहीं बाइक, कार जैसे तीन या चार पहिया वाहन जंग खा रहे हैं। हत्या या आत्महत्या के केस में मृतक के कपड़े, लूट में बरामद नकदी, मिलावटी खाद्य सामग्री, दवाएं आदि बर्बाद हो चुकी हैं। इसे लेकर नौ सितंबर को तत्कालीन डीजीपी एएल बनर्जी, 15 अप्रैल 2015 को तत्कालीन डीजीपी एके जैन, 14 सितंबर 2015 को तत्कालीन डीजीपी जगमोहन यादव ने निस्तारण के दिशा निर्देश दिए गए लेकिन अनुपालन में हीलाहवाली होती रही। क्रिमिनल मामलों के जानकार एडवोकेट अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार थानों में तमाम ऐसे माल मुकदमाती यानी मुकदमे से संबंधित माल होते हैं, जिनका आसानी से निस्तारण किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए हॉयर अथॉरिटी को पॉलिसी तय करनी होती है।
कच्ची की गंध से पुलिस वाले परेशान
कप्तानगंज, हर्रैया, परशुरामपुुर, दुबौलिया, कलवारी आदि थानों में कच्ची शराब और शीरे के ड्रमों की भरमार है। चुनाव आयोग के निर्देश पर पिछले सालों में संपन्न पंचायत और विधानसभा चुनाव के दौरान पुलिस और आबकारी टीमों ने हजारों लीटर शराब बरामद किया था। कई कच्ची की फैक्ट्रियां पकड़ी गई थीं। जो परिसर में पड़ी हैं। उनसे उठती गंध हमेशा परिसर में फैली रहती है। जिससे पुलिस कर्मी परेशान हैं।
सबसे ज्यादा बाइक और कार
थानों में सबसे ज्यादा बाइक, कार और तीन पहिया वाहन कबाड़ जैसे पड़े हैं। अच्छी खासी इस्तेमाल लायक बाइक और चमचमाती कारों में जंग लग रहा है। इसके अलावा गांजा-चरस और संदिग्ध दवाएं पड़ी हैं। जानकार बताते हैं कि इनकी मजिस्ट्रेट की अनुमति से नीलामी कराई जाती है।
जल्द बदलेगी थानों की सूरत
एसपी दिलीप कुमार का कहना है कि जल्द ही थानों की सूरत बदली नजर आएगी। सभी थानों में निस्तारण योग्य वस्तुएं सूचीबद्ध कराई जा रही हैं। जिन वस्तुओं के निस्तारण में कानूनी अड़चन नहीं होगी, उनके निस्तारण की प्रक्रिया शुरू होगी। ताकि थानों का परिसर स्वच्छ और सुंदर दिखे।