गौर(बस्ती)। इसी साल इंटर की परीक्षा में 80 फीसदी से ज्यादा अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं के क्षत-विक्षत शव टिनिच में रेलवे ट्रैक पर मिलने से सनसनी फैल गई। एक ही गांव की रिहाइश और हम उम्र होने से दोनों के बीच लगाव और प्रेम में विफलता पर खुदकुशी करने की चर्चा है। पुलिस घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर मिले लड़के के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाने के प्रयास में है।
रेल पटरी पर युवक-युवती के शव रविवार सुबह देखे जाने के बाद आसपास के लोग जुटे लेकिन सिर और चेहरे ट्रेन से बुरी तरह कट जाने के कारण एकाएक शिनाख्त नहीं हो सकी। काफी मशक्कत के बाद साफ हुआ कि युवक कुचुरूपुर गांव का अमरनाथ था और साथ मौजूद युवती इसी गांव की रागिनी (राका) इस सूचना के बाद दोनों के घर वाले मौके पर पहुंचे लेकिन मौत के कारणों को लेकर दोनों परिवारों ने अंत तक खामोशी बरती।
घर वाले यह भी नहीं बता सके कि दोनों कब घिर से निकले थे। माना जा रहा है कि शनिवार देर रात आंधी-बारिश शुरू होने पर युवती घर वालों से निगाह बचाकर बाहर निकल गई, जबकि युवक भोर में नित्य क्रिया की बात कहकर निकला और लौटा नहीं। मौके पर हादसा, खुदकुशी और हत्या की आशंकाओं के कयास उठते रहे लेकिन गांव कुचुरूपुर से लेकर मृतकों के सहपाठियों के बीच की कानाफूसी में प्रेम में विफलता पर खुदकुशी पर ज्यादा जोर रहा।
एसपी कृृपाशंकर सिंह का कहना है कि पहली नजर में आत्महत्या का मामला लग रहा है। इनके घरों के करीब रहने वालों के बीच से दोनों के बीच प्रेम संबंध की बात सामने आई है लेकिन पुलिस जांच में अन्य पहलुओं पर भी गौर किया जाएगा।
रेल राज्य मंत्री की ट्रेन से मिली पहली जानकारी
बस्ती। देवरिया में निजी कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा की विशेष बोगी दिल्ली से आने वाली वैशाली एक्सप्रेस में लगाई गई थी। रविवार भोर में टिनिच क्षेत्र से गुजरते समय वैशाली एक्सप्रेस के ड्राइवर ने शवों को ट्रैक पर देखा। उसकी सूचना पर रेलवे की तरफ से गौर थाने को जानकारी दी गई और पुलिस शवों तक पहुंची।
चर्चा में रस्सी की मौजूदगी
बस्ती। रेल पटरियों पर शव के करीब रस्सी का बड़ा टुकड़ा मिलने से दोनों के गले में फंदा लगाए जाने की चर्चा भी मौके पर गहराई। दोनों के घर वालों के कुछ न बोलने से फंदे की चर्चा को बल नहीं मिला। छानबीन के बाद एएसपी रोहित मिश्र ने कहा कि रस्सी की पास में मौजूदगी संयोग हो सकती है। रस्सी पर रक्त का त्वचा का कोई अंश नहीं मिला है, जबकि फंदा लगाने की स्थिति में रस्सी पूरी तरह बेदाग नहीं मिलती।
बीएससी एजी की तैयारी में था अमरनाथ
बस्ती। अलग-अलग कॉलेजों से इसी साल इंटर की परीक्षा पास करने वाले अमरनाथ और रागिनी की सहपाठियों में गिनती मेधावियों में होती थी। दोनों को 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक मिले थे। बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के इरादे से अमरनाथ ने कानपुर के कॉलेज में प्रवेश परीक्षा भी दी थी।