बस्ती। मंगलवार को मुठभेड़ में मुंडेरवा पुलिस के हत्थे चढ़ा दिलीप सोनी गैंग ने ही परशुरामपुर क्षेत्र के शक्तिचौरा में 17 जून को बैंक कर्मी के रुपये और लैपटॉप लूटा था। इसका सरगना दिलीप जिले का टॉप टेन बदमाश है। उसके खिलाफ लूट, हत्या के प्रयास, डकैती, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट आदि 18 मुकदमे दर्ज हैं। हाल ही में वह जेल से छूटा है।
चालक को गोली मारकर कार लूट कर भागते समय मुंडेरवा थाने के खजौला चौकी स्टाफ की पकड़ में आए दिलीप सोनी और उसके भरोसेमंद प्रदीप गौड़ से पूछताछ के दौरान इसका पर्दाफाश हुआ। इनका तीसरा साथी अंकित तिवारी भी लूट में शामिल था, जो मुठभेड़ के समय बाइक लेकर फरार होने में कामयाब रहा। उसकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं।
एसपी कृपा शंकर सिंह ने बुधवार को प्रेसवार्ता के दौरान पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पकड़े गए दिलीप सोनी निवासी मनकरपुर थाना कप्तानगंज और प्रदीप निवासी नेतवारी थाना तारून जनपद फैजाबाद ने कबूल किया कि अंकित के साथ बैंक कर्मी से नकदी व लैपटॉप लूटे थे। लैपटॉप नहर में फेंक कर रुपये लेकर चलते बने। एसपी ने बताया कि लूटी गई रकम सिर्फ 18 हजार थी, जबकि बैंक कर्मी परशुरामपुर थानाक्षेत्र के महेवा निवासी ओम प्रकाश वर्मा ने रकम 1.20 लाख बताते हुए मुकदमा लिखवाया था। एसपी ने सफाई दी कि वादी ने रकम गलत बताई थी। बाद में कबूल किया कि उसके बैग में सिर्फ 18,600 रुपये ही थे। बकौल एसपी, घटना के बाद से ही दिलीप पर नजर थी। मगर पुलिस को यह अनुमान नहीं था कि दिलीप इस तरह हत्थे चढ़ेगा।
बदमाशों के कब्जे से पुलिस ने नाइन एमएम पिस्टल मय 9 कारतूस और दो मैग्जीन, एक तमंचा 315 बोर और 1 खोखा, 7900 रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा कांटे के पास मंगलवार को लूटी गई कार, 2 मोबाइल और एक बैंक आईडी भी बरामद की गई जो परशुरामपुर के वादी ओमप्रकाश की है।
टीम को मिला पांच हजार का इनाम
एसपी ने इस साहसिक कार्य के लिए टीम को पांच हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा की है। टीम में सीओ रुधौली आरएन सिंह, स्वाट टीम प्रभारी सर्वेश राय, हमराही आदित्य पांडेय, मनोज राय, आनंद यादव, मनींद्र चंद, अरविंद यादव, अमित पाठक, अजय दुबे और मुंडेरवा थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह के अलावा खजौला चौकी इंचार्ज अमर नाथ यादव, प्रमोद यादव, अभिषेक, हरिओम, जितेंद्र शाही आदि शामिल हैं।
रेकी कर दिया लूट को अंजाम
लुटेरों ने परशुरामपुर के सेंट्रल बैंक पर कई दिनों से रेकी की थी। जब ओम प्रकाश वर्मा को चिह्नित कर 17 जून को इन तीनों (दिलीप, प्रदीप और अंकित) ने इस उम्मीद पर हाथ डाला कि उसके पास कम से कम एक लाख रुपये होंगे। बैग में लैपटॉप होने से देखने में भी वह भारी लगा। उसमें रकम मात्र 18,600 रुपये ही हाथ आई। भागकर तीनों गोरखपुर जा पहुंचे और योजनाबद्ध ढंग से 21 जून को सुबह रेलवे स्टेशन गोरखपुर से बस्ती के लिए कार बुक कराई। सोनू कार में सवार हो गया और बाकी दो बाइक पर थे। हाइवे पर संतकबीरनगर के कांटे से आगे आने पर दिलीप ने पूर्व योजना के अनुसार शौच का बहाना बनाकर गाड़ी रुकवाई। चालक बंटी पुत्र ओमप्रकाश निवासी हुमायूंपुर गोरखपुर जैसे ही गाड़ी से उतरा, इसके दो साथी प्रदीप व अंकित तिवारी बाइक से आ पहुंचे और चालक को गोली मार गाड़ी लेकर भाग लिए। बाद में घेराबंदी के बीच पुलिस के हत्थे चढ़ गए।