सूबे के खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री लक्ष्मीकान्त उर्फ पप्पू निषाद को जेल भेजे जाने के कुछ ही घंटे के भीतर अस्पताल में शिफ्ट होने का मामला तूल पकड़ने लगा है। सीजेएम के आदेश पर 14 दिन के न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए राज्यमंत्री किस बीमारी से ग्रसित हैं इसे लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश सरकार के दबाव में सीने में जलन और घबराहट का बहाना बनाकर राज्यमंत्री को अस्पताल में शिफ्ट किया गया। कहा जा रहा है कि डाक्टरों से जबरन रेफर करने की रिपोर्ट लिखवाई गई।
इस हाईप्रोफाइल मामले में सीएमओ डॉ. जेपी सिंह कोई जवाब देने से बच रहे हैं। इसी बीच जेलर बीके मिश्र के छुट्टी पर चले जाने से प्रकरण तूल पकड़ने लगा है। पैनल में शामिल डॉक्टर गोपनीयता की आड़ लेकर मुंह खोलने से बच रहे हैं।
यूं तो शुक्रवार को पप्पू निषाद की जमानत अर्जी खारिज होते ही प्रदेश भर में यह प्रकरण सुर्खियों में आ गया। मगर जब लोगों को मंत्री के आश्चर्यजनक ढंग से जेल से ओपेक हास्पिटल कैली में शिफ्ट कर दिया गया तो सवालों की बौंछार होने लगी। सीएमओ के निर्देश पर जिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. रामजी सोनी, डॉ. रमेश चंद्रा और डॉ. अनिल कुमार चौधरी की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इसकी संस्तुति पर राज्यमंत्री को जेल भेजा गया। शनिवार को पूरे दिन राज्यमंत्री से मिलने भारी तादाद में समर्थक आते-जाते रहे। खासकर पार्टी नेताओं की आवाजाही ज्यादा रही।
मुकदमा दर्ज करने में भी रसूख रोड़ा
यह मुकदमा दर्ज होने में भी रसूख रोड़ा बना। राज्यमंत्री पर पैतृक गांव बेलहर कला में 2006 में एक महिला के घर में घुसकर मारपीट करने के साथ लूटपाट और बलवा करने का आरोप है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) संजय कुमार गौड़ ने शुक्रवार को मेंहदावल विधानसभा सीट से विधायक और राज्य मंत्री को जेल भेजने का आदेश दिया। जमानत न होने के कारण सीजेएम न्यायालय ने पिछले माह राज्यमंत्री के विरूद्व गैर जमानती वारंट जारी किया था। सूत्रों ने बताया कि बखिरा क्षेत्र के बेलहर गांव निवासिनी चांदमती ने सन् 2006 में मेंहदावल विधायक पप्पू निषाद समेत अन्य पर बलवा, घर में घुसकर मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने की तहरीर दी लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
तब पीडित महिला ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए 156 (3) के तहत आदेश लेकर बखिरा थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। इस मामले में पप्पू निषाद ने जमानत नहीं करवाया था। महिला को न्याय देने व उसके प्रार्थना पत्र पर पिछले माह गैर जमानती वारंट जारी किया था। शुक्रवार को जब राज्यमंत्री सीजेएम न्यायालय में जमानत अर्जी लगाने के साथ हाजिर हुए तो न्यायालय ने उनकी अर्जी खारिज करते हुए 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत जेल भेज दिया।
चार को ही बीत गई थी अंतिम मियाद
राज्यमंत्री पप्पू निषाद ने जेल से बचने के लिए तमाम पैंतरे आजमाए लेकिन उनकी एक न चली। अदालत से जारी गैरजमानती वारंट के खिलाफ हाईकोर्ट गए ,लेकिन न्यायालय ने राहत देने के बजाए उन्हें 15 दिन के अन्दर अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय द्वारा दी गयी मियाद चार जुलाई को समाप्त हो गयी थी। कहा जा रहा है कि इसीलिए अदालत ने बिना कोई नरमी दिखाए जेल भेज दिया।