फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेल हादसे से बस्ती में कोहराम

Mon, 21 Nov 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
विज्ञापन
कुदरहा क्षेत्र के रसूलपुर गांव के अनिल पाल के दाह संस्कार पर सरयू तट पर जुटे लोग।
विज्ञापन
कानपुर के निकट पोखरायां में रविवार को हुए पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना में हताहतों की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है। जिसमें जिले के दो लोग शामिल हैं। सहारा इंडिया में कार्यरत रहे अनिल कुमार पाल के अलावा मुंडेरवा थानाक्षेत्र के अहिरौली के रहने वाले अरविंद कुमार उर्फ गुड्डू की मृत्यु भी इस हादसे में मौत हो गई। सोमवार को दोनों शवों का अंतिम संस्कार किया गया। अनिल कुमार पॉल का अंतिम संस्कार अयोध्या के सरयू तट पर किया गया, जबकि गुड्डू का शव गांव में रीति-रिवाज के मुताबिक दफन किया गया। इस दुर्घटना में जिले के रहने वाले दोनों लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से सभी गमगीन हैं।  
विज्ञापन


 रेल दुर्घटना में मृत अनिल कुमार पाल को सरयू नदी के अयोध्या घाट  पर सोमवार को मुखाग्नि दी गई । असमय मौत की खबर से मर्माहत शुभचिंतकों का  ताता उनके घर रसूलपुर से कानपुर तक लगा रहा। पेशे से शिक्षक रह चुके  जगदंबिका प्रसाद पाल की आखों के सामने उनके बुढ़ापे की लाठी धू धू कर जल  रही थी । ऐसे में ढाढ़स बधाने के शब्द किसी के मुंह से नहीं निकल पा रहे थे। रसूलपुर गांव में कोहराम मचा हुआ है। गांव के होनहार बेटे ने अपने संघर्ष के  बलबूते सहारा इंडिया में छोटी सी नौकरी शुरू की। काम के प्रति लगन और  ईमानदारी से तरक्की मिलती गई और वह एक्जीक्यूटिव आफिसर के पद तक पहुंचे। बच्चों की पढ़ाई के लिए लखनऊ में एक छोटा सा मकान बना लिए थे, जिसमें पत्नी लता पाल बेटे अंकुर और शिवम के साथ रहती थीं।

सुबह जब  बेटे अंकुर की मोबाइल पर पापा के नंबर से घंटी बजी तो वह खुशी से चहक उठा। लेकिन जब उधर से मनहूस खबर मिली। शिवम  ने गांव पर अपने 70 वर्षीय बाबा को इस अनहोनी की जानकारी दी। रोते   चिल्लाते लोग कानपुर के लिए रवाना हुए। भोर में ही पोस्टमार्टम के बाद शव  परिजनों को मिल गया। बड़े बेटे अंकुर ने अपने पिता को मुखाग्नि दी तो एक बार फिर लोग फफक पड़े।
विज्ञापन


अहिरौली निवासी अरविंद कुमार उर्फ गुड्डू  (22 वर्ष) का शव सोमवार को जैसे ही घर पहुंचा पूरे गांव पर मानो पहाड़ टूट पड़ा हो। उनकी मां मीरा देवी, बुआ, भाईयों और रिश्तेदार के अलावा पड़ोसियों तक के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। हर एक दूसरे को चुप कराने में खुद अपने ही आंसू नहीं रोक पा रहा था। छोटे भाई रवि के कंधे पर ही अब परिवार की जिम्मेदारी आ पड़ी है। 
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें