मनरेगा की तर्ज पर रोजगार गारंटी कार्ड बनाया जाएगा जबकि 170 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाएगी।
बस्ती। सारी कोशिशों के बावजूद जिले में मनरेगा में सुधार नहीं हो रहा है। जिले के 636 ग्राम पंचायत के हजारों मजदूर हैं, जिन्हें अप्रैल में एक दिन भी काम नहीं मिला। जिसके चलते मजदूर के परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों को काम न मिलने और प्रदेश स्तर पर जिले की खराब प्रगति के लिए खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदार माना जा रहा है। इसके लिए सीडीओ सोबरन सिंह ने सभी बीडीओ को कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।
मजदूरों को गांव से पलायन को रोकने के लिए गांव में ही रोजगार देने की बनाई मनरेगा की स्थित जिले में दयनीय है। इस योजना के संचालन में बीडीओ कोई रुचि नहीं ले रहे हैं, जिसके चलते सरकार की मंशा तो धूमिल हो ही रही है, साथ ही मजदूर गांव से बड़े शहरों की ओर पलायन करने लगे हैं। नियमानुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रति दिन कमसे कम मनरेगा के दो कार्य होने चाहिए, ताकि मजदूरों को काम मिलता रहे।
सीडीओ द्वारा इस मामले में जो पत्र लिखे गए हैं, उससे पता चलता है कि बीडीओ भुगतान और कार्य दोनों करने में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। सीडीओ ने बताया कि अप्रैल में बहादुरपुर, कुदरहा, परशुरामपुर, रामनगर और साउंघाट ब्लॉक के बीडीओ ने एक भी कार्य नहीं कराया और न एक भी मजदूर को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया। इसी तरह अन्य ब्लॉकों की प्रगति भी दयनीय है। जिले में कुल 12 फीसदी ही कार्य हुआ।