लखनऊ से बेटे की दवा करा कर लौट रहे बनवरिया निवासी अतुल कुमार पांडेय की मार्ग दुर्घटना में बाराबंकी के पास बृहस्पतिवार को मौत हो गई थी। जिस समय उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हुई थी उस दौरान कार में बैठी पत्नी पिंकी तथा दो वर्षीय बेटा हार्दिक भी था। घटनास्थल पर ही अतुल की मौत हुई जबकि मां और बेटे ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।
लांस नायक अतुल पांडेय की मौत की जानकारी पर इलाहाबाद हेडक्वार्टर राजपूताना बटालियन के फोर रैपिड यूनिट बाराबंकी पहुंची। विधिक औपचारिकताओं के बाद शुक्रवार सुबह तिरंगे में लिपटा अतुल पांडेय का शव लेकर जवान बनवरिया गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया। साथ ही पत्नी पिंकी तथा बेटे हार्दिक का शव बगल में रखा गया। परिवार के तीन शव देखकर अतुल के दिव्यांग पिता सूबेदार व दिव्यांग भाई अजीत के साथ मौजूद जन समूह सिसक उठा। मिलनसार व्यक्तित्व के धनी रहे अतुल को यादकर लोगों को लगा कि उन्होंने अपने सगे बेटे या भाई को खो दिया है। अतुल की मां उमा के रोने पर हर किसी की आंखों से आंसू छलक गए।
राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
बनवरिया से जीआरडी गोरखपुर तथा इलाहाबाद की राजपूताना टीम के साथ क्षेत्रीय लोगों संग तीनों का शव मखौड़ा धाम लाया गया, जहां नायब सूबेदार राम बहादुर गुरुंग, नायब सूबेदार पुष्पराज सिंह, नायक धर्मेंद्र सिंह तथा प्रकाश तामांग ने राजकीय सम्मान के साथ अतुल पांडे तथा उनकी पत्नी व बच्चे को अंतिम विदाई दी। सशस्त्र सैनिकों ने अपने साथी को अंतिम विदाई दी। इसके बाद अतुल के चाचा देवी प्रसाद पांडे ने अतुल पांडे तथा उनकी पत्नी को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी। बगल में ही मासूम हार्दिक के शव को भी दफन कर दिया गया।
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दिव्यांग सूबेदार का परिवार बिखर गया
बेटा भी है दिव्यांग, एक मात्र सहारा थे अतुल
फौजी की मां उमा और दिव्यांग भाई बेहाल
अच्युतानंद मिश्र
परशुरामपुर।
तिनका-तिनका एक कर खूबसूरत आशियाना का सपना सूबेदार और उमा का उस समय बिखर गया जब एकमात्र कमाऊ बेटे लांस नायक अतुल कुमार पांडेय की परिवार सहित दुर्घटना में मौत हो गई। कुदरत का कहर इतना ही नहीं लांस नायक के साथ ही आंखों की रोशनी दो वर्षीय पोते हार्दिक और बहू पिंकी की जीवन डोर भी समाप्त हो गई।
अतुल पांडेय की पढ़ाई-लिखाई से लेकर उनके लालन-पालन में सूबेदार पांडेय ने कहीं कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। खुद दिव्यांग और दूसरा बेटा भी दिव्यांग होने से अतुल की परवरिश अपनी हैसियत से ज्यादा व्यवस्था देकर की। मेहनत रंग लायी और सन 2002 में ही इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही अतुल पांडेय का चयन राजपूताना रेजीमेंट में हो गया। इलाहाबाद में ही पोस्टिंग भी हुई। धूमधाम से विवाह किया और एक पोता भी आंगन में आया। अतुल पांडेय हंसमुख तथा मिलनसार स्वभाव के होने से परिवार के साथ-साथ गांव तथा क्षेत्र के लोगों में भी प्रिय थे। लोगों का भी पूरा पूरा ख्याल रखते थे। समय निकालकर मां-बाप की दवा का प्रबंध करने में लगे रहते थे। गांव, रिश्तेदारी में पड़ने वाले तमाम सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर भाग लेते और सहयोग भी करते। अब इन्हीं कार्यों की लोगों में मात्र चर्चा बची है। सूबेदार पांडेय का दूसरा बेटा अजीत भी दिव्यांग है। ऐसे में अतुल के ही कंधे पर ही गृहस्थी चलाने का पूरा जिम्मा था। दुर्घटना में मौत के पहले दिन को पूरे गांववालों ने छिपा लिया लेकिन शुक्रवार को तिरंगे में लिपटा शव द्वार पर लाया गया तो माता-पिता भाव शून्य हो गए। इसके बाद रोने-चीखने से हर किसी का कलेजा फट गया। किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी कि दिव्यांग पिता और मां को ढांढस बंधाता।
साथ-साथ फेरे, एक साथ चिता
सात जनम के संबंधों का गाना फिल्मों में सुनाई देता है। लेकिन शुक्रवार को बनवरिया गांव में सच दिखा। लांस नायक अतुल और उनकी पत्नी पिंकी की चिताएं एक साथ मखौड़ा धाम में सजाई गईं। क्षेत्रीय लोगों और विभागीय अधिकारियों के बीच चाचा देवी प्रसाद ने जब चिता को मुखाग्नि दी तब पति-पत्नी के बीच अनूठे प्रेम की चर्चा होने लगी। श्मशान घाट पर मौजूद लोगों का कहना था कि जब तक रहे तब तक दांपत्य जीवन का निर्वहन करते हुए पूरे परिवार का भरण-पोषण करते रहे और जब जाना हुआ तो भी दोनों ने एक साथ दुनिया से विदा ले ली। यही नहीं मासूम हार्दिक को दुनिया में कोई अनाथ न कह सके, इसलिए दोनों के साथ ही नन्हीं जान भी चली गई। यह चर्चा गांव की महिलाओं में भी रही।