हर्रैया/बस्ती। बृहस्पतिवार देरशाम घाघरा में डूबी नाव रविवार को 15 किमी पूरब कलवारी-टांडा पुल के पास मिल गई। मगर चारों किसानों का पता नहीं चला। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच तलाशी अभियान में बाधा आती रही, जिसके कारण किसानों का पता लगाने में रविवार को भी कामयाबी नहीं मिली।
30वीं वाहिनी पीएसी गोंडा के 12 जवानों की टोली दो मोटरबोट लेकर घाघरा में रविवार देर शाम तक तलाशी करती रही। फैजाबाद से मंगाए एक और स्टीमर पर पुलिस-प्रशासन के लोग भी अभियान में हाथ बंटा रहे हैं। बीडी बंधे के आसपास गांव के नौजवान भी अपने तरीके से पानी में उन्हें ढूंढने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
क्षेत्र के चार किसान परिवारों के मुखिया के नदी में डूबकर लापता होने को हल्केे ढंग से लेने और कोई प्रभावी कोशिश करने में नाकाम जिला प्रशासन पर लोगों की नाराजगी काफी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि सिर्फ लेखपालों को भेजकर तहसील प्रशासन भी चुप बैठ गया।
गायब पिपरी के छोटे लाल, सुरजू और पारा के माया राम और बीहड के परिवार वालों का कहना है कि यदि प्रशासन संवेदनशील होकर गंभीरता से ढूंढने का प्रयास किया होता तो अब तक कोई न कोई जरूर मिला होता। दूसरे दिन से ही न तो एसडीएम पहुंचे और न तहसीलदार ही चारों परिवारों को सांत्वना देने पहुंचे। जिससे ग्रामीण निराश होने लगे हैं।
यह रहा घटनाक्रम-
बृहस्पतिवार देरशाम पारा और पिपरी गांव के 25 किसान घाघरा नदी के दक्षिण बिन चिरागी गांव देवरा गंगबरार से गेहूं की सिंचाई कर नाव से लौट रहे थे। कोहरे के कारण बाढ़ के समय टूटकर गिरे पेड़ से टकरा कर नाव पलट गई और सभी डूबने लगे। पास में मछली पकड़ रहे अंबेडकरनगर के मछुआरों ने 21 लोगों को बचा लिया। लेकिन पिपरी निवासी 48 वर्षीय छोटे लाल, 18 वर्षीय सुरजू और पारा निवासी 52 वर्षीय मायाराम व 20 वर्षीय बीहड़ लापता हो गए।
मछुआरों ने इन्हें बचाया
नाव डूबने की घटना में पारा के ग्राम प्रधान मुकेश सिंह व पूर्व प्रधान इंद्रलाल के अलावा सुग्रीव सिंह, राम नयन, कृष्ण चंद, सत्यदेव, रामानंद, गिरजेश, पुल्लूर, धर्मेंद्र सिंह, राघव सिंह, रजवंत, महेश सिंह, दिनेश, राम वचन के अलावा पिपरी के निवासी जगदीश, मंजीत, राम चरन, डेबा, गिरजेश, बेचू बचाए गए।