कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद पूर्वमंत्री रामकरन आर्य को जेल ले जाती पुलिस।
करीब 22 वर्ष पुराने बहुचर्चित शंभू पाल हत्याकांड में अभियुक्त सपा सरकार में मंत्री रहे रामकरन आर्य को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार पुंडीर ने नामजद बाकी सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया है। जेल जाते समय पूर्व मंत्री आर्य ने खुद को निर्दोष बताते हुए ऊपरी अदालत में अपील दाखिल करने की बात कही है।
23 नवंबर 1994 को दोपहर करीब 12 बजे फव्वारा तिराहे पर भरवलिया निवासी शंभू पाल की गोली मारकर हत्या की गई थी। इसमें राज्य मंत्री रामकरन आर्य सहित 11 लोग आरोपी थे। कांग्रेस पार्टी से तत्कालीन सदर विधायक जगदंबिका पाल (वर्तमान में डुमरियागंज के भाजपा सांसद) के परिवार से जुड़े सदस्य की हत्या को लेकर सूबे की सियासत में हलचल मच गई थी।
मुकदमे में अभियोजन पक्ष की सुनवाई 2012 में पूरी होने के बाद विभिन्न कारणों से सुनवाई में देरी होती रही। इससे क्षुब्ध होकर पीड़ित पक्ष उच्च न्यायालय जा पहुंचा। इस पर हाईकोर्ट ने तीन महीने के अंदर मुकदमे को निस्तारित करने का आदेश दिया। बाद में हाईकोर्ट ने इस केस में रोजाना बहस कराने का निर्देश दिया। जिससे सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पूर्व मंत्री रामकरन आर्य को हत्या का दोषी पाते हुए उम्र कैद और 23 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। पुलिस ने तत्काल पूर्वमंत्री को हिरासत में लेकर जिला कारागार भेज दिया।
23 नवंबर 1994 को दोपहर 12 बजे तत्कालीन विधायक रामकरन आर्य कंपनी बाग से गांधी कला केंद्र की ओर जा रहे थे। पीछे से तत्कालीन विधायक सदर जगदंबिका पाल के चचेरे भाई शंभू पाल जीप से आ रहे थे। ब्रेक फेल होने से उनकी गाड़ी रामकरन आर्य की गाड़ी से टकरा गई थी। इसके बाद दोनों में विवाद हो गया, जिसकी परिणति शंभू पाल की हत्या के रूप में हुई।