बस्ती। नरेंद्र बहादुर सिंह की हत्या मामले में अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह ने सगे भाइयों सहित पांच को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता रामअनुज भास्कर ने घटना के बारे में बताया कि विशेषरगंज में स्थित मकान के स्वामित्व विवाद को लेकर दुबौलिया थाना क्षेत्र के सरैया अतिबल निवासी नरेंद्र बहादुर सिंह पुत्र बलवंत सिंह और कृष्ण मुरारी के मध्य मुकदमा चल रहा था।
इसी रंजिश को लेकर 2 मार्च 2003 को कृष्ण बिहारी, कृष्ण मुरारी पुत्रगण जयमंगल सिंह, नरेंद्र सिंह पुत्र परमात्मा सिंह, प्रहलाद सिंह पुत्र दुर्गा प्रसाद सिंह, परमात्मा सिंह पुत्र धनराज एक गोल एक राय होकर लाठी डंडा, फरसा, तमंचा से लैस होकर मकान के सामने आ गए। वहां मौजूद नरेंद्र बहादुर को जान से मारने की धमकी देते हुए बुुुरी तरह मारा पीटा। दौरान इलाज उसी दिन नरेंद्र बहादुर की जिला अस्पताल में मृत्यु हो गई।
दिवंगत के भाई विजय प्रकाश सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज होकर पांचों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन की ओर से आठ गवाहों का बयान दर्ज कराया गया। बचाव पक्ष से झूठा फंसाए जाने की बात कही गई। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर जज ने पांचों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर साढ़े अस्सी हजार अर्थदंड भी लगाया। इसे अदा न करने पर तीन वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड की धनराशि में से पचास प्रतिशत दिवंगत नरेंद्र बहादुर की विधवा या उसके न होने की दशा में उनके वारिसों को देने का आदेश दिया।
एनडीपीएस एक्ट में चौदह साल कारावास
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह ने तीन किलोग्राम अवैध चरस बरामद होने के मामले में आरोपी को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी मानते हुए चौदह साल के सश्रम कारावास और डेढ़ लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। शासकीय अधिवक्ता राम अनुज भाष्कर ने घटना का विवरण देते हुए न्यायालय को बताया कि वादी मुकदमा एसओ दुधारा वंशराज ने थाना दुधारा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह अपने हमराही के साथ 29 अक्टूबर 2000 को गश्त पर थे।
शाम के साढ़े चार बजे खटियहवां चौराहे के पास एक व्यक्ति को संदेह होने पर रोका तो वह भागने लगा। उसकी पहचान अब्दुल रउफ उर्फ रउफ बाबा निवासी छपिया माफी थाना दुधारा के रूप में हुई। उसके पास से आधा आधा किलो के छह पैकेट में कुल तीन किलोग्राम चरस बरामद हुआ। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर जज ने चौदह साल के सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।