गौर थानाक्षेत्र के हरनाखूरी गांव में करौंदा तोड़ने के विवाद में 29 मई 2008 को हुई हत्या के एक मामले में तीन सगे भाइयों समेत पांच को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। एडीजे पंचम विवेक त्रिपाठी की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए प्रत्येक अभियुक्तों पर 30-30 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
शासकीय अधिवक्ता वंदना चौधरी व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी विसेंत मिश्र ने अदालत को बताया कि गौर थानाक्षेत्र के हरनाखूरी निवासी अमरदीप ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें 28 मई 2008 को गंगाराम की लड़कियों ने उसके बाग से करौंदा तोड़कर घर ले गईं। जिसकी शिकायत करने पर उनके घर के लोग नाराज हो गए। अगले दिन 29 मई को नौ बजे सुबह नहर की पैमाइश हो रही थी, जहां वह भी मौजूद था। इसी बीच गंगाराम आ गए और गाली देते हुए मारने के लिए दौड़ा लिए। जान बचाने के लिए घर की तरफ भागा।
बचाव में उसके चाचा रामजी और भाई आकाश दीप, कमलदीप व परिवार की औरतें आ गईं। बगल गन्ने के खेत से कुदाल लेकर गंगाराम व राजीव कुमार भी आ गए। इस मारपीट में आकाशदीप की मौके पर ही मौत हो गई थी। रामजी और राम चंद्र आदि को भी चोटें आईं। पुलिस ने विवेचना के बाद छह लोगों के विरुद्घ चार्जशीट दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी राम सुयश की मौत हो गई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने पांच लोगों को सजा तय कर दिया। जिनमें गंगाराम पुत्र राम कृपाल, राजेंद्र, राजमन व राजीव पुत्रगण राम सुयश व जगराम पुत्र रामफेर शामिल हैं।