बस्ती। महिला अस्पताल में बदइंतजामी का आलम है। अस्पताल में स्थाई सीएमएस
की तैनाती न होने से डॉक्टर और स्टाफ मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं।
प्रसूताओं के इलाज में लापरवाही बरती जा रही है। ओपीडी में मरीजों से जांच
और दवाओं के नाम पर वसूली की जा रही है। बच्चों के टीकाकरण में भी स्टाफ
नर्स और हेल्थ विजिटर खुलेआम वसूली कर रही हैं। बुधवार को ‘अमर उजाला’ की
पड़ताल में टीकाकरण कक्ष में मौजूद कर्मचारी धड़ल्ले से रुपये लेतीं मिलीं।
अलबत्ता सीएमओ ने लिखित में ही शिकायत मिलने पर कार्रवाई की बात कही।
बुधवार
को दिन में 11.29 बजे अस्पताल में दो सौ प्रसूताएं पर्ची लेकर डॉक्टरों को
दिखा रही थीं। ओपीडी में डॉ. नासिर कमाल, डॉ. अलका शुक्ला, डॉ. ममता रानी,
डॉ. सीमा चौधरी आदि मौजूद थीं। पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर
बड़ी संख्या में महिलाएं बरामदे में बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं।
पैथोलॉजी में 35 मरीजों के रक्त केनमूने लिए जा चुके थे।
टीकाकरण
कक्ष में काफी संख्या में महिला और पुरुष बच्चों को टीका लगवाने आए थे।
ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी हर मरीज से टीका लगाने और रजिस्टर पर नाम दर्ज
करने के लिए एवज में बीस बीस रुपये वसूल कर रही थीं। कैमरे में इनकी तस्वीर
कैद होती रही। अचानक इनकी नजर पड़ी तो असहज हो गईं।
बाद में अपने
काम के प्रति सफाई देने लगीं। अल्ट्रासाउंड कक्ष के पास प्रसूताओं के साथ
आए कई मरीजों ने बताया कि अल्ट्रासाउंड के नाम पर सौ रुपये लिए जा रहे हैं।
हालांकि इन लोगों ने अपने मरीज के हित की दुहाई देकर अपना नाम न छापने का
अनुरोध किया।
इस संबंध में अस्पताल के प्रभारी सीएमएस और सीएमओ डॉ
जेपी सिंह ने बताया कि सुविधा के एवज में रुपये देना गलत है। लेना गलत है
या नहीं इस सवाल को वह टाल गए।
एडी हेल्थ डॉ रामचंद्र ने कहा कि
महिला अस्पताल में स्थाई सीएमएस की तैनाती न होने से काम जरूर प्रभावित हो
रहा है। लेकिन तैनाती तो शासन को करनी है। इसकी समय समय पर सूचना भेजकर
स्थाई सीएमएस का अनुरोध शासन से किया जा रहा है। जांच के नाम पर वसूली के
मामले में वह सीएमओ से जानकारी कर कार्रवाई कराएंगे।