जिला कारागार में तैनात बंदीरक्षक आलोक पाल (38) की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। मंगलवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे सरकारी क्वार्टर में उनका शव फंदे से लटकता मिला। आलोक आवास में अकेले ही रहते थे। पत्नी-बच्चों समेत परिवार के अन्य सदस्य सुल्तानपुर में रहते हैं।
आलोक मूल रूप से सुल्तानपुर के रहने वाले थे। घटना की जानकारी जब सहकर्मियों को हुई तो जेलर की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। बंदीरक्षक के परिवारवालों को भी घटना की जानकारी दी गई। पुलिस के मुताबिक प्रथमदृष्ट्या आत्महत्या का मामला लग रहा है। इसके पीछे वजह पारिवारिक विवाद माना जा रही है।
बंदीरक्षक आलोक सुबह 8:30 बजे कारागार ड्यूटी पर नहीं आए तो उनके सहकर्मी सरकारी क्वार्टर में उन्हें बुलाने पहुंचे। काफी देर तक आवाज देने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो अनहोनी की आशंका सताने लगी। रोशनदान से झांकने पर छत के कुंडे से लटका शव देखकर लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जेलर अनिल कुमार सुधाकर ने बताया कि बंदीरक्षक आलोक पाल यहां तकरीबन 10 साल से तैनात थे। पड़ोसियों का कहना है कि सोमवार रात वे घर में मोबाइल पर पत्नी से बात कर रहे थे। किसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी हो रही थी और जोर-जोर से आवाज आ रही थी। जेलर के मुताबिक मौत की असल वजह पुलिस की तहकीकात के बाद ही सामने आ सकेगी।
पूर्व जेलर के भतीजे थे आलोक
आलोक पाल जिले में तकरीबन 10 साल पहले तैनात रहे जेलर महावीर पाल के भतीजे बताए जाते हैं। तत्कालीन जेलर महावीर पाल ने अपने कार्यकाल के दौरान ही जिले में बंदीरक्षकों की नियुक्ति के दौरान आलोक की भर्ती कराई थी। आलोक पाल अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी महज 11 साल की है।