कप्तानगंज। बहूभोज के दौरान सामान घटने पर बाजार जा रहे युवक की बाइक ऑटो की चपेट में आ गई। गंभीर घायल युवक ने जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज जाने के दौरान दम तोड़ दिया। परिजन शव को लेकर कप्तानगंज थाने पहुंचे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
हादसा कप्तानगंज-पंडूलघाट मार्ग पर सोमवार रात अचेकवा पुल के पास रात करीब साढ़े नौ बजे हुआ। पुल के पास तेज रफ्तार ऑटो की बाइक में ठोकर लग गई। बाइक चालक प्रदीप उर्फ विक्की (25) पुत्र कांशीराम निवासी महुलानी बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद चालक ऑटो छोड़कर भाग निकला। आसपास के लोगों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कप्तानगंज पहुंचाया, जहां से जिला अस्पताल बस्ती रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखकर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया था। सूचना पर अस्पताल पहुंचे परिजनों के मुताबिक सोमवार को प्रदीप का गौना आया था। गठबंधन के बाद घर पर बहूभोज कार्यक्रम चल रहा था। किसी सामान की जरूरत हुई, जिसे लेेने के लिए बाजार निकला था। इस संबंध में प्रभारी थानाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार ने बताया कि ऑटो चालक मौके से फरार हो गया। ऑटो को कब्जे में ले लिया गया है। अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
तीन दिन सुहागन की उजड़ गई सपनों की दुनिया
बहूभोज में बाजार निकले पति की सड़क हादसे में मौत
ब्रजेश त्रिपाठी
कप्तानगंज। दो दिन पहले विवाह के बाद गौने आई दुल्हन की दुनिया गठबंधन के बाद ही उजड़ गई। बहूभोज कार्यक्रम के दौरान सामान लेने बाजार निकले दूल्हे की हादसे में मौत हो गई। यह हादसा हुआ उर्मिला के साथ। जिसे सपनों की दुनिया में कदम रखे अभी महज तीन दिन ही बीते थे।
पति प्रदीप उर्फ विक्की (23) निवासी महुलानी बुजुर्ग गठबंधन के बाद सोमवार रात करीब साढे़ नौ बजे बहूभोज में घटे सामान को लेने निकले। पंडूलघाट मार्ग पर अचेकवा पुल के पास ऑटो की चपेट से घायल हो गए। मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले जाते समय संतकबीरनगर के पास दम तोड़ दिए। पति की मौत से उर्मिला बेसुध है। दहाड़ें मार कर रो रही उर्मिला की हालत जिसने भी देखी उसकी आंखें भर आईं। गौर थाना क्षेत्र के दुबौली निवासी उर्मिला की आठ जून को शादी हुई थी। बरात नौ जून को विदा हुई। इसके एक दिन बाद 10 जून को गौना में विदा होकर उर्मिला अरमानों के साथ अपनी ससुराल पहुंची। सोमवार शाम को मांगलिक गीतों के साथ गठबंधन का कार्यक्रम हुआ। लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। जिस घर में कुछ समय मंगलगीत हो रहे थे, वहीं, चीख-पुकार मच गई। करुण क्रंदन सुनाई देने लगा। प्रदीप के पिता काशीराम, मां शीला देवी जवान बेटे की मौत से बेसुध हो गए। दुल्हन के हाथों की मेहंदी का रंग भी नहीं चढ़ पाया, पति और ससुराल वालों के साथ दो पल भी नहीं बिता पाई थी कि हादसा हो गया। प्रदीप की मौत को लेकर समूचा गांव दुखी है। लोग नवविवाहिता के भविष्य को लेकर चर्चा कर रहे हैं।