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नीलगाय से टकराई बाइक, युवक की मौत

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शुभम फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
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टिनिच। 
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गौर के सुल्तानपुर गांव से परशुरामपुर के सुकरौली स्थित नाना के घर जा रहे युवक की बाइक से अचानक नीलगाय टकरा गई। बाइक समेत सड़क पर गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हर्रैया सीएचसी के डॉक्टरों ने फैजाबाद रेफर कर दिया, जहां पहुंचने के पहले उसने दम तोड़ दिया। 
गौर थाना क्षेत्र के टिनिच चौकी अंतर्गत सुल्तानपुर गांव के ओम प्रकाश शुक्ल के बड़े बेटे अमित का 11 मार्च को तिलकोत्सव है। किसी काम से छोटा बेटा शुभम शुक्ल (18) सोमवार की शाम बाइक से परशुरामपुर थाना क्षेत्र के सुकरौली गांव ननिहाल जा रहा था। अभी वह गुलरिया चौराहे के पास पहुंचा ही था कि तभी सड़क पार कर रही नीलगाय से बाइक जा टकराई। टक्कर लगते ही बाइक समेत शुभम सड़क पर जा गिरा। सिर पर हेलमेट नहीं होने से ज्यादा चोट लगी। हादसे के बाद आसपास जुटे लोगों ने डॉयल 100 पुलिस को सूचना देकर घायलावस्था में शुभम को हर्रैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। तब तक परिवार के लोग भी पहुंच गए। सीएचसी के डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद हालत में सुधार नहीं होते देखकर जिला चिकित्सालय फैजाबाद रेफर कर दिया। जहां पहुंचने से पहले ही रास्ते में शुभम ने दम तोड़ दिया। परिवारवालों के मुताबिक शुभम अपने नाना को लाने सुकरौली जा रहा था। मौत की जानकारी होते ही पूरे घर में कोहराम मच गया।
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 में मची चीख
बभनान। 
गौर थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव के ओम प्रकाश के बड़े बेटे अमित कुमार शुक्ल की शादी की तैयारियां चल रही थीं। 11 मार्च को तिलक जबकि 18 अप्रैल को शादी सुनिश्चित है। लेकिन सड़क हादसे में छोटे बेटे की मौत से खुशियों की जगह मातम पसर गया है। 
अमित का छोटे भाई शुभम शुक्ल अपनी ननिहाल जा रहा था कि सोमवार की शाम उसकी बाइक के सामने नीलगाय आ टकराई। हर्रैया सीएचसी के डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखकर फैजाबाद रेफर कर दिया लेकिन रास्ते में ही शुभम ने दम तोड़ दिया। बेसुध हुए पिता ओम प्रकाश शुक्ल ने बताया कि बड़े बेटे की शादी को लेकर घर में बड़ी धूमधाम से सारी तैयारियां चल रही थीं। हादसे में छोटे भाई की मौत के बाद शव देखकर अमित यही कह रहा कि अब छोटा भाई कहां मिलेगा और बेहोश हो जाता है। परिवारवालों के मुताबिक शुभम बस्ती के रामबाग विद्यालय में पढ़ाई करता था और इस वर्ष उसने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। भाई की मौत पर बहन गुंजन, आंचल का रो-रो कर बुरा हाल है। बहनें और मां ममता शुक्ला भी बेटे की मौत पर बेसुध हो गईं हैं। मां होश आते ही सिर्फ मुझे अपना लाल चाहिए कहकर रोने लगतीं हैं। 
अधूरा रह गया इंजीनियर बनने का सपना 
रामबाग विद्यालय से पढ़ाई कर रहे शुभम शुक्ला का सपना भी उसी के साथ खत्म हो गया। पिता के मुताबिक शुभम होनहार लड़का था और उसकी पढ़ाई पर सभी को नाज था। वह हमेशा यही कहता था कि पापा इंटर की परीक्षा अच्छे नंबर से पास होने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई पढ़ करूंगा। शुभम के पिता दिल्ली में रहकर छोटी-मोटी नौकरी करके उसी कमाई से परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई चलाते हैं। 
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हेलमेट होता तो बच जाती जान 
परिवार के सदस्य और गांव तथा रिश्तेदार यही कह रहे हैं कि शुभम बाइक चलाते समय यदि हेलमेट पहना होता तो शायद इतनी बड़ी घटना न होती और उसकी जान भी बच जाती।
 
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