बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम हर्ष कुमार अग्रवाल ने बहला-फुसला कर अगवा करने व दुष्कर्म के आरोप में दोषी करार दिया है। आरोपी को इस मामले में कोर्ट ने दस वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही बीस हजार रुपये अर्थदंड भी आरोपी को अदा करना होगा। इसे अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि में से दस हजार नियमानुसार पीड़िता को मिलेगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जय गोविंद सिंह ने कोर्ट में घटना का विवरण प्रस्तुत किया। कहा कि कलवारी थाना क्षेत्र के एक गांव के पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री को जो स्कूल में पढ़ने गई थी को एक सितंबर 2009 को विद्यासागर बहला फुसलाकर अगवा कर ले गया। जब वह घर नहीं लौटी तो उसकी तलाश शुरू हो गई। इस बीच एक रिश्तेदार ने सूचना दी कि उसे विद्यासागर के साथ देखा गया है। पीड़ित के पिता ने दुष्कर्म की आशंका व्यक्त करते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी। 13 मार्च 2011 को कोर्ट के आदेश पर इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। 18 जून 2015 को पीड़िता बरामद हुई। तब उसने आपबीती बताई। पीड़िता के बयान व डॉक्टरी मुआयना के आधार पर विवेचक ने रेप का भी मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन की ओर से पीड़िता सहित दस गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष से भी दो गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिसमें विद्या सागर को गलत ढंग से फंसाने का आरोप लगा। न्यायाधीश ने गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया।