छह की मौत से बेलवाडाड़ में कोहराम
रायबरेली में सड़क हादसे की सूचना पर पूरा गांव स्तब्ध
कलवारी/गायघाट (बस्ती)।
राम-जानकी मार्ग से जोड़ने वाले कलवारी चौराहे से एक किलोमीटर पहले स्थित बेलवाडाड़ गांव पर रविवार सुबह मानों पहाड़ टूट पड़ा हो। यहां के मिश्रा परिवार के छह लोगों की एक साथ सड़क हादसे में मौत से पूरा कलवारी क्षेत्र स्तब्ध है।
भोर पांच बजे की घटना की सूचना गांव के लोगों को सुबह आठ बजे मिली। वहां के सुरेंद्र मिश्र के मोबाइल पर उनके पड़ोसी बाराबंकी में तैनात पुलिस सब इंस्पेक्टर प्रेमचंद्र मिश्र का फोन आया। बमुश्किल 19 सेकेंड की बातचीत के बाद मिश्र के हाथ से मोबाइल छूटकर गिर गया। आसपास मौजूद सुरेंद्र के परिवार और अन्य लोगों की समझ में सहसा कुछ नहीं आया। मगर अप्रत्याशित तरीके से दहाड़ें मारकर रो रहे सुरेंद्र मिश्र को देखकर सभी भीतर तक हिल गए। जो भी देखता, कांप उठता था। उम्र में उनसे बड़े कुछ लोगों ने झकझोर कर पूछा, तब जाकर वह मात्र इतना बता पाए कि कार हादसे में सब खतम हो गया। हालांकि, कुछ ही देर में सबको पता चल गया कि रायबरेली रोड पर बछरावां के पास परिवार के छह लोगों की हादसे में मौत हो गई है। कुछ ही देर में पूरा गांव-जवार दरवाजे पर इकट्ठा हो गया। चूंकि, विंध्याचल से लौटकर बेलवाडाड़ आने के लिए लखनऊ जाने के बजाए अंबेडकरनगर से टांडा पुल होते हुए आना था, इसलिए लोग काफी देर तक इस भ्रम में रहे कि यह परिवार रायबरेली कैसे पहुंचा। मगर पास-पड़ोस के बाकी लोग जानते थे कि विंध्याचल से लौटकर यह लोग लखनऊ स्थित मकान पर होते हुए आएंगे।
दादी बोलीं, मुझे उठा लेते भगवान
कलवारी चौराहे से एक किलोमीटर पहले के इस गांव में 95 वर्षीय चंपाकली के परिवार में तब से विपत्ति लौटी, जबसे उनके तीसरे पुत्र विष्णुमोहन गायब हुए। बताते हैं कि पत्नी की असामयिक मौत का उन्हें गहरा सदमा लगा और कुछ ही महीने में घर से लापता हो गए। हादसे में छह लोगों की मौत की जानकारी होते ही दादी विक्षिप्त सी हो गईं। उनके मुंह से सिर्फ यही निकल रहा था कि भगवान मुझे उठा लेते। एसपी कार्यालय बाराबंकी में उप निरीक्षक पद पर कार्यरत प्रेमचंद्र मिश्र तीन भाइयों में दूसरे नंबर के हैं। सबसे बड़े कमल नयन मिश्र शिक्षक हैं। दरोगा प्रेमचंद्र का परिवार लखनऊ में मकान बनाकर रहता था। पांच साल पहले पत्नी की मौत के बाद वह अपने इकलौते बेटे पंकज उर्फ दिव्य कुमार मिश्र के साथ लखनऊ रहने लगे। साफ्टवेयर इंजीनियर पंकज मिश्र नोएडा पहुंचे और कनाडा की एक कंपनी ज्वाइन कर ली।
चार मार्च को हुई थी पंकज की शादी
बीते चार मार्च को हरदोई की रहने वाली शक्ति मिश्रा से ई. पंकज की शादी हुई। जो लखनऊ स्थित विवेकानंद हॉस्पिटल में नर्स थीं। पंकज के साथ रहकर उनकी दो बहनें 22 वर्षीय दीपिका उर्फ शालू और 20 वर्षीय दिव्या के अलावा चचेरे भाई 12 वर्षीय अर्पित और ममेरी बहन ज्योति उर्फ मुलकी निवासी सुअरहा पढ़ती थीं।
छह साल में आठ की आकस्मिक मौत
पांच वर्ष पूर्व प्रेमचंद्र मिश्र की पत्नी कलावती की मौत हो गई। गांव के एक होनहार इंजीनियर को खोने का दुख सबको है। सबका कहना है कि दरोगा के परिवार पर किसी की नजर लग गई है। छह वर्ष के भीतर परिवार के आठ लोगों की असामयिक मौत से परिवार उबर नहीं पा रहा। पहले दरोगा ने अपनी भयहु दुर्गावती को खोया। फिर अपनी पत्नी कलावती, उसके बाद छोटे भाई विष्णु मोहन भी उनके देखते-देखते ओझल हो गए। अब वह बेटा-बेटी ही नहीं बहू, भतीजा और भांजी को खोकर पूरी तरह से टूट चुके हैं। उनकी हालत देखकर लोगों का कलेजा मुंह को आ रहा है।
हादसे से शुभचिंतक भी हतप्रभ
परिवार के छह लोगों की मौत की खबर सुनकर दरवाजे पर लोगों का तांता लग गया। कुछ घनिष्ठ संबंधियों ने आंसुओं से भरे कंठ से अपनी भावना साझा की। गांव के प्रभात मिश्र कहते हैं कि मां-बाप का इकलौता होने के बावजूद पंकज बचपन से ही मृदुभाषी थे। छुट्टी में घर आने पर गांव में सबसे मिलते-जुलते थे। पडोसी सुरेन्द्र मिश्र बताते हैं कि पढ़ाई में वह होनहार थे। दरोगा जी के बलिया में तैनाती के दौरान पंकज ने दसवीं परीक्षा में बलिया जिला टॉप किया था। उसकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने लखनऊ के बाबू बनारसी दास से बीटेक करते हुए कालेज टॉप किया था। सहपाठी राहुल तिवारी ने मेधावी होने के बात की तस्दीक की। कहा कि उसने कभी भी किसी की उपेक्षा नहीं की। ग्राम प्रधान सरोज चौधरी ने बताया कि पिछली बार पंकज जब घर आए तो गांव के विकास के बारे में लंबी चर्चा की।