खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच के दौरान नौ माह में तीन सौ नमूने एकत्रित किए थे। इनमें से अधिकांश की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार सात नमूने ऐसे पाए गए हैं, जो मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इसके चलते मनुष्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकता है। इसके अलावा 97 नमूने ऐसे पाए गए हैं, जिनमें मिलावट है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए जाने वाले सात नमूनों के लिए आयुक्त खाद्य सुरक्षा को मुकदमा दर्ज कराने के लिए फाइल लखनऊ भेजी है, जबकि अन्य मामलों में एडीएम की सहमति के लिए फाइल भेजी गई है।
अप्रैल 2017 से लेकर जनवरी 2018 तक खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान चलाकर जिले भर में करीब तीन सौ नमूने भरे। इन्हें लखनऊ स्थित जन विश्लेषक को जांच के लिए भेज दिया गया। इन नमूनों की जांच रिपोर्ट आ गई है। इनमें 22 दूध के नमूनों में पानी की मिलावट पाई गई, जबकि छह खोया, दो पनीर, 29 मिठाई, एक आइसक्रीम, एक मसाला, दो पान मसाला, चार बेसन व दाल, दस बेकरी उत्पाद, चार नमकीन, चार नमक, तीन अन्य सामान में मिलावट पाई गई है। इनके खिलाफ विभाग ने कार्रवाई के लिए एडीएम को फाइल भेज दी है।
इसके अलावा जांच में सात नमूनों मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों की मिलावट पाई गई है। इसमें दो बर्फी के नमूने हैं, जिस पर चांदी के बजाय एन्युमिनियम का वर्क पाया गया। इसके अलावा दाल के एक नमूने में कीडे़ पाए गए, मिठाई के एक नमूने में घातक रंग का इस्तेमाल पाया गया, नमकीन के दो नमूनों में भी घातक रंगों का इस्तेमाल जांच में सामने आया है। इसके अलावा मूंगफली का भी एक नमूना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया है। इनके खिलाफ विभाग ने आयुक्त खाद्य सुरक्षा को मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति के लिए फाइल भेज दी है।
अभिहित अधिकारी रमेश चंद्र पांडेय ने बताया कि अभियान के दौरान लिए गए नमूनों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मिलावट गंभीर है। ऐसे प्रकरण में संबंधितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जबकि सामान्य मिलावट के लिए जुर्माने का प्रावधान है।