टॉलरेंस के नाम पर दफ्तरों में व्यवस्था जीरो
भ्रष्टाचार, सुशासन, ई-गवर्नेंस में लागू है जीरो टालरेंस
दायरे में रखे गए बीमारी, दैवी आपदा, हादसा या साजिश, अपराध
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। भ्रष्टाचार और सुशासन का दावा करके सत्ता में आई भाजपा सरकार का पहला ही वचन झुठलाने पर सरकारी मशीनरी आमादा है। आला अफसरों की पहली ही बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने के लिए सहेजा था। हिदायत दी गई थी कि सरकारी ही नहीं अर्धसरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के दफ्तरों में सिटीजन चार्टर लागू किया जाए।
शुरुआत में अवाम की उम्मीदें परवान पर थीं। लगा कि अब कोर्ट कचहरी में जमीन-मकान के छोटे-मोटे विवाद सुलझने की राह खुल गई। स्कूल-कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थाओं और नौकरी या ठेका हासिल करने के सत्यापन प्रमाणपत्र के लिए न तो बाबू-अफसर या मध्यस्थ की मुट्ठी गरम करनी पड़ेगी, न ही अब खसरा-खतौनी, आय-जाति अथवा निवास प्रमाण पत्र के लिए तहसील के चक्कर काटने पडे़ंगे। दावा किया गया था कि तय समय के भीतर फाइल लटकाने पर जवाब तलब किया जाएगा। लेकिन स्टेप-बाई-स्टेप काउंटरों पर अब समस्या ज्यादा बढ़ गई है। जिसकी बानगी समय-समय पर सामने आती रहती है लेकिन विभागों में कार्य-संस्कृति वही पुरानी ही कायम है। डीएम डॉ. राजशेखर का कहना है कि टालरेंस पॉलिसी सख्ती से लागू है। उल्लंघन करने वाले पर कार्रवाई होगी।
पासपोर्ट, जाति प्रमाणपत्र, राशन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जैसे कामों में देरी न हो। इसके लिए 17 मार्च 2016 को केंद्रीय कैबिनेट ने सिटीजन चार्टर बिल को मंजूरी दी। इसमें आम लोगों को एक तय समयसीमा के भीतर सरकारी सेवा पाने का अधिकार है। न करने पर जुर्माना तनख्वाह कटौती का प्रावधान है। सभी सरकारी विभागों को चार्टर प्रकाशित करवाया गया। सेवाओं के लिए समयसीमा का जिक्र रहता है। अधिकारी का नाम और पद भी सार्वजनिक करना है। सरकारी अधिकारी पर प्रतिदिन 250 न्यूनतम व अधिकतम 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
केस एक
पिछले हफ्ते डीएम डॉ. राजशेखर अचानक सदर तहसील में निरीक्षण करने जा धमके। चिराग तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ हुई। बाकी बातों के अलावा एक 70 साल का बुजुर्ग डीएम के सामने आ खड़ा हुआ। एक दाखिल-खारिज के लिए 13 साल से वसीयत का प्रकरण लंबित है। मामले में डीएम ने एसडीएम और तहसीलदार को तगड़े निर्देश दिए।
केस दो
बहादुरपुर ब्लॉक के प्रतापपुर, नरायनपुर गांव के प्रशांत सिंह को कुछ दिन पहले चिकन पॉक्स हुआ। साथ ही हॉस्टल में रहने वाले दूसरे बच्चे को भी यह संक्रमण हुआ। घर भेजने पर दूसरे बच्चे के चचेरे भाई और बहन को भी दाने निकल आए। 16 अगस्त से लेकर सीएमओ, डीएम तक के संज्ञान में आने के बावजूद 20 अगस्त तक स्वास्थ्य विभाग टस से मस नहीं हुआ।