ट्रेनिंग वाले दरोगा के स्टार पर सवाल
डबल स्टार लगाने की शिकायत पर सख्ती
हाईकोर्ट की फटकार पर भी सुधरे नहीं हालात
अधिकारियों की मौन सहमति से कानून की उड़ा रहे धज्जियां
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। अनुशासन और कर्तव्यपरायणता वाले विभाग के सब इंस्पेक्टर कंधे पर डबल स्टार टांगने के लिए इतने उतावले हैं कि बिना ट्रेनिंग पूरी किए ही थाने के बड़े साहब यानी थानेदारी के तेवर में आ गए। समय से पहले परिपक्व दिखाने के चक्कर में बिना तीन वर्ष का व्यावहारिक प्रशिक्षण किए एसआई जैसे दो-दो स्टार लगाकर घूम रहे हैं। बुधवार को ऐसा ही एक मामला डीआईजी के सामने आया। जिसमें हर्रैया सर्किल के आवेदक ने शिकायत की कि उसके केस की विवेचना अप्रशिक्षित उप निरीक्षक कर रहे हैं। साथ गए अधिवक्ता ने पूरी विवेचना असंवैधानिक करार देते हुए दलील दी कि कंधे पर डबल-स्टार लगाने के कारण पहले तो शक नहीं हुआ लेकिन अब हकीकत सामने आ गई। रेंज में बस्ती के अलावा संतकबीरनगर व सिद्धार्थनगर जिले में कुल 41 थाने हैं। जिनमें बस्ती, खलीलाबाद, बांसी और नौगढ़ कोतवाली के साथ ही 37 थाने हैं। जहां इधर औसतन तीन एसआई ऐसे तैनात हैं, जिनकी अभी तीन वर्ष की प्रशिक्षण (परिवीक्षा) रत रहेंगे। इस अवधि में एक स्टार लगाने की अनुमति होती है। डीआईजी के अनुसार एसआई की परिवीक्षा अवधि में एक स्टार लगाने की अनुमति है। ऐसी इसलिए है, ताकि ट्रेनिंग और नियमित एसआई में फर्क पता चल सके। इधर, एसपी दिलीप कुमार का कहना है कि डीआईजी का पत्र मिला है। सूचनाएं इकट्ठा कराई जा रही हैं। यदि ऐसा मामला आता है तो यथोचित कार्रवाई की जाएगी।
मौन सहमति पर जवाब तलब
हाईकोर्ट की कई बार फटकार लगाने के बावजूद पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे हैं। जबकि प्रशिक्षणरत उप निरीक्षक एसआई की तरह खुलेआम ड्यूटी करते दिख जाएंगे। डीआईजी डॉ. राकेश शंकर ने जवाब मांगा है। साथ ही रेंज के तीनों एसपी से रिपोर्ट मांगी है कि क्या उनके जिले में प्रशिक्षणरत एसआई डबल स्टार लगा रहे हैं और क्यों? डीआईजी के मुताबिक संतकबीरनगर व सिद्घार्थनगर की तुलना में बस्ती जिले में ऐसी शिकायत सबसे ज्यादा है। सूत्रों के अनुसार सबसे कम संतकबीरनगर में ऐसा है।
एचसीपी भी दरोगा जैसे
प्रोन्नत वेतनमान एसआई (एचसीपी) हूबहू दरोगा जैसी वर्दी में रौब गांठ रहे हैं। जबकि यह नियमों का सख्त उल्लंघन है। एसपी स्तर से कई बार कहा गया कि एचसीपी अपनी निर्धारित वर्दी (काले जूते व एक स्टार) की जगह दरोगा की वर्दी (दो स्टार और लाल जूते) में ड्यूटी न करें। क्योंकि दरोगा और एचसीपी में अंतर करना मुश्किल है। चेतावनी भी दी गई थी कि अगर कोई ऐसा करते मिला तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा।