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खाली हाथ सरकारी अस्पताल, निजी अल्ट्रासांड सेंटरों की भरमार

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खाली हाथ सरकारी अस्पताल, निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भरमार
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- जिले में प्राइवेट 55 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं पंजीकृत
- जिला व महिला अस्पताल में नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड
- पांच सौ से सात सौ रुपये खर्च कर रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। स्वास्थ्य सेवाओं पर भले ही हर माह लाखों रुपये खर्च हो रहे हो, लेकिन जिले में इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। यहां सरकारी अस्पतालों में कैली को छोड़कर बाकी में अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रही है।
सरकारी अस्पतालों में मशीन को ऑपरेट करने के लिए डॉक्टर नहीं हैं। जबकि जिले में निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भरमार है। सरकारी अस्पताल के हाथ चिकित्सकों से खाली हैं। महिला अस्पताल में कई महीने से अल्ट्रासाउंड हीं हो रहा है, जिसके चलते गभर्वती महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। या तो ये तीन किमी की दूरी तक कर कैली में अल्ट्रासाउंड कराएं या फिर प्राइवेट सेंटर पर। इसके एवज में इन्हें पांच से सात सौ रुपये देने पड़ रहे हैं। कैली चिकित्सालय तो यहां महज दो चिकित्सक ही अल्ट्रासांउड कर रहे हैं, जिसके चलते यहां लोगों की भीड़ लगी रहती है। कई बार तो लोगों का नंबर दूसरे या तीसरे दिन आता है। मजबूरन लोगों को प्राइवेट सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। जिला अस्पताल का भी यही हाल है। यहां भी कई माह से चिकित्सक नहीं है, ऐसे में लाखों रुपये की मशीन यहां धूल फांक रही है। जबकि स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जांचों में अल्ट्रासाउंड है। इस समस्या को लेकर स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने कई बार आवाज भी उठाई, लेकिन सब नगाड़ घर में तूती ही साबित हुई। समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई। एडी हेल्थ डा रंगजी दूबे कहते हैं कि समस्या संज्ञान में है, रेडियोलॉजिस्ट की डिमांड की गई है। उपलब्ध होने पर रिक्त स्थानों पर भेजा जाएगा।
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जिले में प्राइवेट 55 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं पंजीकृत
एक तरफ जहां सरकारी अस्पतालों में मरीजों का अल्ट्रासाउंड तक नहीं हो पा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ जिले में प्राइवेट 55 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं, जो कि सरकारी सेवाओं को मुंह चिढ़ा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड न होने से इसका फायदा बिचौलिए खूब उठा रहे हैं। क्यों कि गर्भवती महिलाओं सहित अन्य को यह जांच अवश्य लिखी जाती हैं। सूत्रों की मानें तो सरकारी अस्पतालों में कुछ डॉक्टरों की प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों से सेंटिग है, जो अपने चुनिंदा प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर मरीजों को भेजते हैं, जिसके बदले में इन्हें 50 प्रतिशत कमीशन मिल जाता है।
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