इनमें वैध और अवैध ढंग से होती है खून की आपूर्ति
स्वास्थ्य विभाग नर्सिंग होम व क्लीनिक की जांच में जुटा
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। खून के अवैध कारोबार की पोल खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग जिले में वैध व अवैध नर्सिंग होम की सूची बनाने में जुट गया है। हालांकि वर्तमान विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में तीन सरकारी अस्पतालों व सीएचसी-पीएचसी के अलावा 65 नर्सिंग होम संचालित हैं, जिनमें से चालीस में सर्जरी भी होती है, पर यह सर्जरी कौन करता है इसका उल्लेख कागजों में दर्ज नहीं है।
जिले में दो दर्जन से अधिक ऐसे नर्सिंग होम भी चल रहे हैं, जिनका न तो पंजीकरण है और न ही वहां कोई रजिस्टर्ड डाक्टर मरीज देखता है। आशंका है कि इन वैध व अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में खून का धंधा जमकर चल रहा है। इसका कारण अस्पतालों व नर्सिंग होम में दलालों का नेटवर्क है। इसमें कुछ डाक्टरों की भी संलिप्तता बताई जा रही है। हालांकि इसका स्वास्थ्य प्रशासन सिरे से खारिज करता है। यह धंधेबाज किसी भी समय जरूरतमंदों से पांच से छह हजार रुपये लेकर खून की आपूर्ति कर देते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि मरीज या उनके परिजनों को यह भी पता नहीं होता कि जो खून उन्हें दिया जा रहा है वह वास्तव में किस ग्रुप का है। यह अलग बात है कि दलाल उन्हें यह इत्मिनान दे देता है कि जो खून उसे दिया जा रहा है वह उसी ग्रुप का है, जिसकी जरूरत है।
सीएमओ डा. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि जिले के सभी 65 निजी नर्सिंग होम व 200 क्लीनिक की जांच के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में दलालों के रैकेट को रोकने का काम अस्पताल के अधिकारियों का है। इसके लिए अधिकारियों से बात की जाएगी।