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दो लेखपाल बर्खास्त, 35 निलंबित
95 बैकफुट, इनमें 93 लेखपालों ने संभाला बस्ता
कुल 600 लेखपालों पर ‘नो वर्क-नो पे’ फार्मूला लागू
जिला व तहसील पदाधिकारियों सहित 10 पहले से निलंबित
25 लेखपाल सोमवार को सस्पेंड, 382 को सेवा समाप्ति की नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। आर या पार की स्थिति में पहुंचे राजस्व लेखपाल आंदोलन में सोमवार को उस समय तल्खी आ गई, जब नए भर्ती दो लेखपालों की सेवा समाप्ति कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई। प्रशासन का चेतावनी नोटिस नजरअंदाज करके नौकरी गंवाने वाले दो नव नियुक्त लेखपालों के अलावा 35 अन्य पर भी प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है। इनमें जिला व तहसील संगठन के 10 पदाधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका था। इस तरह से नए व पुराने सहित जिले के कुल 695 लेखपालों में से 382 को चेतावनी नोटिस जारी किया जा चुका है। कुल 600 लेखपालों पर ‘नो वर्क-नो पे’ फार्मूला पहले से लागू है।
इस बीच प्रशासन की कूटनीति के चलते चारों तहसील मिलाकर 95 लेखपालों को बैकफुट करने में अधिकारी कामयाब रहे। इनमें 93 ने सोमवार शाम तक बस्ता संभाल लिया। डीएम राजशेखर ने बताया कि कर्मचारी आचार संहिता के उल्लंघन के कारण कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर शासन-प्रशासन मजबूर है। उम्मीद व्यक्त की कि जल्द सभी लेखपाल पूर्व की भंाति काम पर लौट आएंगे। मगर चारों तहसीलों पर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के बैनर तले आंदोलन जारी रखा। एक्शन में आए एसडीएम गण ने संबंधित संगठन पदाधिकारियों से संपर्क साधा लेकिन लेखपाल काम पर नहीं लौटे।
मांगें, जिन पर ठनी रार
वेतन उच्चीकरण, वेतन व पेंशन विसंगतियां दूर करने, भत्तों में वृद्धि, राजस्व परिषद से प्रस्तावित राजस्व उप निरीक्षक सेवा नियमावली 2017 कैबिनेट से पारित कराने के अलावा लैपटॉप व स्मार्ट फोन की मांग को लेकर राजस्व लेखपाल आंदोलनरत हैं। राजस्व निरीक्षक पदोन्नति में संग्रह अमीन व भूमि अध्यापित अमीनों के कोटे को समाप्त करने सहित अन्य मांगों को लेकर धरने पर हैं।