टीवी पर सिने स्टार विद्या बालन का ‘जहां सोच, वहीं शौचालय’ वाला स्लोगन बच्चों तक को याद हो चुका है। अमिताभ बच्चन के खुले में शौच जाने वालों की खिल्ली उड़ाने पर सबको मजा आता है, लेकिन इसके जरिए पहुंचाए जा रहे संदेश को किसी ने आत्मसात नहीं किया। कर पाए होते तो बुधवार तड़के हादसे का शिकार हुई पचवस की कमला जिंदा होती। इसके अलावा रुधौली क्षेत्र के भरौली निवासी गुड़िया की हत्या भी शायद न होती। रात के वक्त खेतों की ओर जाने की वजह से उसकी हत्या हुई। पुरानी बस्ती के मनौरी चौराहे के पास तीन दिन पहले एक 12 वर्षीय बालक की सड़क पार करते समय दबकर मौत हो गई थी। वह भी अपने साथी के साथ शौच करने जा रहा था।
आंकड़े बताते हैं कि हाइवे ही नहीं डुमरियागंज, बांसी, मेंहदावल, महुली रोड पर सड़क पार करते समय वाहन की चपेट में आने से होने वाले 80 फीसदी मौतें शौच करने जाने के दौरान हुई हैं। रोड या उसके आसपास बसे घरों से निकलकर लोग सड़क पार निवृत्त होने निकलते हैं। दूसरी तरफ से आ रही गाड़ी की स्पीड का अंदाजा न लग पाने से चपेट में आ जाते हैं।
पहले हालात ने, अब मौत ने मारा
विक्रमजोत। फोरलेन पर वाहन के टकराने से कमला की जान गई मगर परिस्थितियों ने उसे पहले ही अधमरा कर डाला था। गांव में झोपड़ी बनाकर रह रहे फागू के पास एक इंच जमीन नहीं है। पत्नी कमला के साथ किसी तरह उसका गुजर-बसर हो रहा था। बुधवार को पत्नी की मृत्य़ के बाद फागू बेसहारा हो गए। पूछने पर फफक कर रो पड़े। बोले कि उन्हें आज तक कभी भी सरकारी सहयोग नहीं मिला। गांव के समाजसेवी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में सबसे ज्यादा गरीब फागू ही है। कमला हाइवे किनारे स्थित पूर्व सैनिक संजय यादव के घर कोई नहीं रहता था तो रात में वह रखवाली करने जाती थी। सुबह सफाई करके घर आती थी।
जिम्मेदारों के पास सिर्फ आश्वासन
विक्रमजोत ब्लॉक के करीब तीन सौ परिवार वाले पचवस गांव में अभी भी लगभग 160 घरों के लोग शौचालय न होने से खुले में शौच करने जाते हैं। प्रधान लीलावती सिंह ने पिछली सरकार पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि पिछली सरकार में काफी भेदभाव से कार्य हुआ। जबकि एडीओ पंचायत परमेश्वर प्रसाद का कहना है कि जिनका नाम सूची में होता है उनका बनाया जाता है। पात्र होने के बावजूद क्यों नहीं बना, इसे देखा जा रहा है। मनरेगा जॉब कार्ड बनवाने का एडीओ ने आश्वासन दिया है।