पेशी के दौरान पुलिस की कड़ी सुरक्षा
बस्ती। एडीजे प्रथम अशोक कुमार सिंह ने दहेज हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए सास को 14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 75 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जिसे अदा न करने पर दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता रामानुज भष्कर के अनुसार लालगंज थानाक्षेत्र निवासी कमरुलनिशा ने अपनी बेटी रजिया की शादी नेवारी गांव के अजमल के साथ 23 नवंबर 2011 को किया था। शादी में ही हैसियत केेे मुताबिक दान दहेज देकर विदा किया था। ससुराल में सास कमरुननिशा पत्नी विफई उर्फ जमालुद्दीन, ननद शरीफुननिशा व देवर अख्तर दहेज की मांग को लेकर रजिया को प्रताड़ित करते थे। रजिया का पति मुंबई में रहकर रोजी-रोजगार करता था।
घर पर उसे सास व अन्य लोग दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। 16 अक्टूबर 2011 को रजिया ने अपनी चाची से यह बात बताई। इसके घंटे भर बाद ही किसी ने उसे सूचना देकर बताया कि उसकी लड़की को जलाकर मार दिया गया। रात में ही गांव के प्रधान आदि के साथ नेवारी पहुंची। जहां उसकी लाश देखकर हैरान रह गई। उसके बाद सुबह लालगंज थाने पर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमे की विवेचना में तीनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। घटना के समय शरीफुन्निशा व अख्तर नाबालिग थे। इसलिए दोनों का मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया गया। जबकि सास को सजा सुना दी गई।