खास खबर...
जेनरेटर मंगाओ, तब करेंगे बोरिंग
सरकारी खर्चे की मरम्मत पर वसूली
बोरिंग करने में पानी ढोने से बचने को बेतुकी मांग
बहादुरपुर ब्लॉक में पेयजल की हालत पस्त
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। हैंडपंप अथवा ट्यूबवेल की बोरिंग कराना हो या गांव में ट्रांसफॉर्मर बदलवाने अथवा पावर बढ़ाने का मुद्दा हो। फ्यूज जोड़ने, नेटवर्क आदि ठीक करने के लिए मेहनताना देना पड़ता है।
ऐसा एक मामला बहादुरपुर ब्लॉक में सामने आया है। ब्लॉक से खराब हैंडपंप मरम्मत करने पहुंचे मैकेनिक अधूरी बोरिंग छोड़कर भाग निकले। गांव के लोगों ने बताया कि पिपरा गौतम का निवासी मैकेनिक कई दिन से टलमटोल कर रहा है। वहां के अनीस अहमद, राघवेंद्र, श्याम बिहारी, अकबर अली, मान्यवर सिंह आदि पहले उसने अपने आठ मजदूरों के लिए भोजन बनवाया। बाद में बोरिंग करने के लिए जेनरेटर मांगने लगा। जब तक कि लोग जेनरेटर का इंतजाम करते, मकैनिक व मजदूर भाग खड़े हुए। 10-12 व्यक्तियों का भोजन बेकार हुआ। सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पाइप की लंबाई में खेल
कम लंबाई का पाइप डालकर ट्यूबवेल और हैंडपंपों की री-बोरिंग में भी खेल किया जा रहा है। अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से तमाम हैंडपंप और छोटे ट्यूबवेल सूख गए हैं। इसके रिबोर के नाम पर मोटी रकम खर्च की जा रही है। नियम है कि हैंडपंप लगाने के लिए 180 फीट बोरिंग में 160 फीट या अधिक लंबी पाइप डाली जानी चाहिए। लेकिन सूत्रों की मानें तो सिर्फ 100 से 120 फीट पाइप डाले जा रहे हैं। ऐसे में जलस्तर में थोड़ी सी भी गिरावट पर हैंडपंप फेल हो जाते हैं। इसी तरह छोटे नलकूपों (10 एचपी) में भी कम लंबाई के पाइप डाले जा रहे हैं। फिर मेंटेनेंस और री-बोरिंग के नाम पर ठेकेदारों को काम दिया जाता है।