गलत को बढ़ावा और अंदरूनी कलह से हुआ पतन
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अधिकारी स्वाट टीम के सदस्यों के मनमाने कार्य व्यवहार की अनदेखी करते रहे, परिणामस्वरूप टीम के सदस्य गलतियां दर गलतियां करते गए। गैंगरेप के आरोपी की कांबिंग के दौरान बनाए गए वीडियो के पहले चार दिसंबर 2018 को स्वाट टीम पर नकली नोट का कारोबार करने के आरोपी असगर को छोड़ने के लिए उसके परिवार की महिला से पांच लाख रुपये मांगने का ऑडियो वायरल हुआ था। महिला ने आईजी आशुतोष कुमार से मुलाकात कर ऑडियो क्लिप सौंपी। हालांकि, अधिकारियों ने क्लिप की हकीकत जांच किए बिना आरोपी को जेल भेज दिया। अब तक नहीं पता चला कि उस क्लिप का खेल किसने खेला।
एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) को क्राइम ब्रांच की स्वाट (स्पेशल वेपंश एंड टैक्टिस) में बदले जाने के बाद से टीम का कलेवर काफी बदल गया था। इस बीच टीम में शामिल होने की होड़ जबसे शुरू हुई, तब से पुलिस की गोपनीय सूचनाएं सार्वजनिक होने लगीं। पहले कहा गया कि स्वाट टीम के किसी असंतुष्ट सदस्य ने बदनाम करने के लिए ऐसा किया लेकिन ऑडियो की आवाज पहचानने और बातचीत का लहजा सुनने समझने के बाद संदेह के चलते कुछ नहीं हुआ। माना जा रहा है कि उच्चधिकारियों की शह ने स्वाट टीम के कुछ सदस्यों को ज्यादा दुस्साहसी बनाया। कई मौकों पर उल्टा-सीधा काम करने पर भी ऊपर के अधिकारी पर्दा डालते रहे। जब दुस्साहस ज्यादा बढ़ गया तो जोन-रेंज तक के तबादले किए गए। एसपी पंकज कुमार का कहना है कि पुलिस में अनुशासन पहली शर्त है। वर्दी, गाड़ियां और रुतबा पब्लिक की सुरक्षा और कानून के प्रति विश्वास कायम रखने के लिए दी जाती है। इसके साथ खिलवाड़ किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है और जांच भी चल रही है। जांच रिपोर्ट इनका आगे का भविष्य तय करेगी।