गौर। सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। मगर व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। कारण शिक्षकों की कमी है।
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज कछिया का भी यही हाल है। सात एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में बने इस कॉलेज में भवन से लेकर परिसर तक ठीक-ठाक है। मगर विद्यालय में शिक्षक है ही नहीं। 20 साल पुराने इस स्कूल में इंटरमीडिएट की कक्षाओं में पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं है। शिक्षक के अभाव में यहां बच्चों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कॉलेज की छात्रा काजल, रशीदा खातून, रूमा शर्मा, अर्चना गौतम ने कहा कि सात फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली है लेकिन कोर्स को लेकर चिंता है। क्योंकि जब पढ़ाई हुई ही नहीं तो कैसे परीक्षा दी जाएगी। हाई स्कूल स्तर के शिक्षकों से किसी तरह से क्लास में बैठा कर कोर्स पूरा होने की बात कही जा रही है।
पिछड़े इलाके में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की स्थापना होने के बाद उम्मीद जगी थी की अब बेटियां इंटर तक की अच्छी शिक्षा पाएंगी। कॉलेज को इंटर तक की साइंस की मान्यता प्राप्त है। विद्यार्थियों के लिए प्रैक्टिकल के लिए लैब की व्यवस्था भी है लेकिन बिजली व्यवस्था व शिक्षकों के अभाव में सारे उपकरण व भवन बेकार साबित हो रहे हैं। कॉलेज की प्रधानाचार्य मीनाक्षी जायसवाल ने बताया कि इंटर में 29 एवं हाई स्कूल में 14 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत इंटर के बच्चों को लेकर हो रही है। पढ़ाने के लिए आज तक किसी भी शिक्षक की नियुक्ति ही नहीं हुई। बताया कि कॉलेज में तैनात एलटी शिक्षक माधुरी सिंह व अल्पकालिक शिक्षक शिवबरन निषाद, पाटेश्वरी प्रसाद गुप्ता सभी कक्षाओं के परीक्षार्थियों के कोर्स पूरा कराने में जुटे हैं। प्रधानाचार्य ने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी बिजली व्यवस्था को लेकर हो रही है। क्योंकि आज तक विद्यालय को कनेक्शन ही नहीं उपलब्ध हो पाया। जबकि इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया। बिजली व सीसीटीवी कैमरा न होने से इस बार परीक्षा केंद्र भी नहीं बनाया गया। ऐसे में छात्राओं को अन्य परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देनी होगी।