बस्ती। पुरानी बस्ती क्षेत्र के मंगल बाजार स्थित जामा मस्जिद के पास बिजली के खंभे पर फाल्ट दुरुस्त कर रहे संविदा लाइन की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा बिना शटडाउन लिए खंभे पर चढ़ने के कारण हुआ। जानकारी के मुताबिक 33 केवी विद्युत उपकेंद्र पुरानी बस्ती पर तैनात संविदाकर्मी लाइनमैन प्रेमचंद्र वर्मा (32) मूलरूप से गौर क्षेत्र के भुइलापार गांव के रहने वाले थे। वह परिवार के साथ बरदहिया रोड पर स्थित अपने मकान में रहते थे।
बृहस्पतिवार रात शिफ्ट में प्रेमचंद्र वर्मा की ड्यूटी थी। इसी दिन शाम को उपकेंद्र पर शिकायत दर्ज की गई कि जामा मस्जिद की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। फाल्ट दुरूस्त करने प्रेमचंद्र अपने दो साथियों राजेंद्र और मोहम्मद अली के साथ शुक्रवार सुबह आठ बजे पहुंचे। मोहम्मद अली सीढ़ी लेने पटेल चौक चले गए। जबकि राजेंद्र उनके साथ मौजूद रहे। राजेंद्र ने बताया कि मना करने के बाद भी वह निर्माणाधीन मकान की बल्ली के सहारे खंभे पर चढ़ गए। समझाने के बाद भी उन्होंने शटडाउन नहीं लिया। फाल्ट दुरूस्त कर रहे प्रेमचंद्र अचानक तारों से चिपक गए। बताया कि फोन कर उपकेंद्र से आपूर्ति रोकवाई तो प्रेमचंद्र बेसुध होकर जमीन पर गिर गए। आनन-फानन उन्हें मोहल्ले के लोगों की मदद से जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
लगाए होते सुरक्षा उपकरण तो बच सकती थी जान
- शुक्रवार को प्रेमचंद्र भी बिना सुरक्षा उपकरण के ही चलती लाइन पर फाल्ट दुरूस्त कर रहे थे। यदि वह सुरक्षा उपकरण लगाए होते तो शायद जान बच जाती। लाइन पर काम करते समय सीढ़ी, सेंसर वाले हेलमेट, दस्ताने, सेल्फी बेल्ट, डिस्चार्ज रॉड, जूते आदि सुरक्षा के उपकरण होने चाहिए। प्रेमचंद्र ने कोई उपकरण नहीं लगाया था।
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विभाग देगा पचास हजार, पांच लाख देगी आउटसोर्सिंग कंपनी
- अधिशासी अभियंता नगरीय मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रेमचंद्र के परिजनों को आपसी सहयोग से वितरण खंड 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देगा। 25 हजार रुपये उनके बड़े भाई ध्रुवचंद्र को दे दिया गया है। शेष राशि दो दिन में उनके घर पहुंचा दी जाएगी। इसके अलावा उनके बीमा के पांच लाख रुपये आउट सोर्सिंग कंपनी से दिलाए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परिवार की हर संभव मदद की जाएगी।
दो बच्चों के सिर से उठ गया मां के बाद पिता का भी साया बस्ती। संविदा लाइन प्रेमचंद्र की मौत की सूचना जब परिजनों को मिली तो घर में कोहराम मच गया। आनन-फानन परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। बेटे के शव को देखकर उनकी मां बदहवास हो गईं। उनके क्रंदन को देखकर अस्पताल परिसर में मौजूद हर किसी की आंखें डबडबा आईं। दोनों बच्चे पिता के शव को देखकर सुध-बुध खो बैठे। उनकी आखों से बहते आंसू शायद पिता के अब न होने की पूरा कहानी बयां कर रहे थे।
प्रेमचंद्र की पहली पत्नी अधिवक्ता संजू वर्मा की कोविड काल में मौत हो गई थी। उनसे दो बच्चे बड़ी बेटी पलक (13) और बेटा सौरभ (10) हैं। बरदहिया रोड स्थित मकान संजू ने ही बनवाया था। इसी में प्रेमचंद्र अपने दोनों बच्चों और दूसरी पत्नी गायत्री के साथ रहते थे। जिला अस्पताल परिसर में विलाप करते परिजनों को देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। विभाग के लोग और रिश्तेदार पत्नी, बच्चों और उनकी मां को संभालते नजर आए। प्रेमचंद्र के भाई ध्रुव चंद्र ने आंखों में आंसू लिए बताया कि वह उनसे छोटा था। बताया कि वे अपनी माता और अन्य परिजनों के साथ भुइलापार गांव में ही रहते हैं और एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। बताया कि अभी सात माह पहले ही उसने गायत्री से विवाह किया था। पहली पत्नी की मौत के सदमे से वह पूरी तरह नहीं उबर पाया था कि काल ने हमसे हमारा भाई छीन लिया।
प्रेमचंद्र की मौत की सूचना पर जिला अस्पताल पहुंचे परिजन।
प्रेमचंद्र की मौत की सूचना पर जिला अस्पताल पहुंचे परिजन।