बस्ती। गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। जानकारों के अनुसार सिलिंडरों की आवक में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ हैं। इसी वजह से ग्राहकों के सामने रोजाना नए-नए बहाने बनाए जा रहे हैं। अधिकांश एजेंसी पर पांच सौ से एक हजार लोगों की लाइन लगने के बाद भी एक ही काउंटर से पर्ची काटी जा रही है। इस वजह से आधे से अधिक लोग निराश लौट जा रहे हैं।
कटरा-मूड़घाट स्थित एजेंसी पर कतार में लगे राम प्रकाश ने बताया कि उपभोक्ताओं के सामने लाइन की समस्या जानबूझकर पैदा की गई है। ताकि सिलिंडर न देना पड़े। वहीं मो. इरशाद ने कहा कि एजेंसियां उपभोक्ताओं के साथ मनमानी कर रही हैं। पासबुक, बुकिंग होने के बाद भी सिलिंडर नहीं दिया जा रहा है। सबकुछ ऑनलाइन होने के बाद भी मैनुअल पासबुक मांगा जा रहा है, नहीं दिखाने पर सिलिंडर नहीं दिया जा रहा हैं।
मार्च की बुकिंग नंबर पर भी नया सत्र लागू होने की वजह बताकर सिलिंडर नहीं दिया जा रहा है। कुल मिलाकर इस किल्लत में आम उपभोक्ता ही पिस रहे हैं। लोग सिलिंडर के अभाव में मांगलिक कार्य तक नहीं कर पा रहे हैं। वहीं स्टेशन रोड एजेंसी के सामने लाइन में लगे उपभोक्ता रमेश चंद्र ने बताया कि सभी तरह के प्रशासनिक दावे झूठे हैं। यदि पारदर्शी ढंग से सिलिंडर वितरित कराना होता तो भीड़ को देखते हुए पर्ची काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाती है।
एजेंसी के सभी दरवाजे बंद कर दिए जा रहे हैं। हजारों की भीड़ के आगे झरोखे से पर्ची दी जा रही है। पांच मिनट ज्यादा झरोखे के पास किसी को खड़ा नहीं होने दिया जा रहा है। इस व्यवस्था में आम लोगों को कैसे राहत मिल सकती है।
दस दिन बाद डिलीवरी का मिल रहा डेट
एजेंसी पर लाइन में खड़े लोगों को पर्ची के साथ दस दिन बाद डिलीवरी का डेट मिल रहा है। लोग बुकिंग नंबर के साथ पहुंच रहे हैं लेकिन, उन्हें पर्ची दस से बारह दिन के बाद भी दी जा रही है। वह भी गोदाम से सिलिंडर लेने के लिए कहा जा रहा है। संगीता देवी ने बताया कि उन्हें मालवीय रोड एजेंसी से दो दिन पहले लाइन में लगने के बाद पर्ची दी गई है। सिलिंडर के लिए गोटवा गोदाम पर जाने के लिए कहा गया है। वहीं दिलीप कुमार ने बताया कि पर्याप्त सिलिंडरों की आपूर्ति न होने से उपभोक्ताओं को अलग- अलग ढंग से भ्रमित किया जा रहा है। कभी कागजात में कमी तो कभी डिलीवरी डेट आगे बढ़ाकर भीड़ कम की जा रही है।
आपदा में कालाबाजारी का भी खेल
सिलिंडरों की आवक घटते ही कालाबाजारी का भी खेल शुरू हो गया है। जिले में अभी तक केवल एक जगह से ही कालाबाजारी का सिलिंडर पकड़ में आया है। इसके बाद विभाग सुस्त पड़ गया है। जानकारों का कहना हैं कि कालाबाजारी पूरी तरह से सक्रिय हैं। गैस एजेंसियों के गोदामों से सेटिंग बनाकर रसोई गैस महंगे दर पर खरीदा जा रहा है। फिर इसे फुटकर दुकान या रेस्टोरेंट संचालकों के हाथ दो हजार रुपये प्रति सिलिंडर की दर से बेच दिया जा रहा है। बाजार में फुटकर में गैस की कीमत बढ़ गई है। पेट्रोमैक्स साइज वाले छोटे सिलिंडर 400 रुपये में दो किग्रा गैस भरा जा रहा है। जिनके पास रसोई गैस का स्थाई कनेक्शन नहीं हैं वह लोग इन्हीं सिलिंडरों से काम चला रहे हैं।
कोट
रसोई गैस की कालाबाजारी नहीं होने दी जा रही है। विभागीय टीम लगातार चेकिंग कर रही है। यदि किसी एजेंसी से कालाबाजारी की शिकायत मिली तो कार्रवाई होगी। सिलिंडरों की आपूर्ति के लिए भी कंपनियों को लगातार पत्र लिखा जा रहा है।
-विमल कुमार शुक्ल, डीएसओ।