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Basti News: जिला अस्पताल में परामर्श, बाहर से जांच कराना मजबूरी

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ओपीडी में चिकित्सीय परामर्श के लिए इंतजार करते मरीज संवाद
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बस्ती। जिला अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे सेवा ठप होने के कारण मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ रही है। मैन्युअल एक्स-रे के सहारे रोगियों का इलाज किया जा रहा है, अथवा निजी एक्स-रे सेंटर पर जांच करानी पड़ रही है। हालात यह है कि सरकारी अस्पतालों में एक रुपये की पर्ची पर परामर्श तो मिल जा रहा है मगर निजी सेंटरों पर जांच करना मजबूरी बन गई है। इससे मरीजों के जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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शनिवार ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचे लोगों को डिजिटल एक्स-रे के लिए परेशानी झेलनी पड़ी। बताया गया कि डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब है। अभी उसकी मरम्मत चल रही है। ऐसे में साधारण एक्स-रे कराएं। सीने का डिजिटल एक्स-रे लेने पहुंचे संतोष निवासी मूड़घाट, कान के एक्स-रे के लिए पहुंचे गोटवा की संगीता ने बताया कि डिजिटल एक्स-रे की सुविधा अक्सर गड़बड़ी बताकर बंद कर दी जाती है, जिसके कारण हमें डिजिटल एक्स-रे बाहर से कराने पड़ते हैं।
इसी प्रकार संतलाल ने बताया कि उन्होंने डिजिटल की जगह सामान्य एक्स-रे कराया, लेकिन उसमें भी देरी हो रही है। जब तक रिपोर्ट मिल रहा है तब तक ओपीडी से डाॅक्टर उठ जा रहे हैं, ऐसे में अगले दिन रिपोर्ट दिखाने और दवा लेने दोबारा आना पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार, आर्थो विभाग, चेस्ट विभाग, ईएनटी विभाग के साथ इमरजेंसी में आने वाले मरीजों में कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें चिकित्सक डिजिटल एक्स-रे के लिए सलाह देते हैं।
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अस्पताल में यह सुविधा न होने से रोजाना 20 से 25 मरीज बिना जांच के लौट जा रहे हैं। पोर्टेबल एक्स रे मशीन भी फिल्म के अभाव में क्रियाशील नहीं है। शनिवार को ओपीडी में 746 नए रोगी आए जबकि पुराने 156 मरीजों ने परामर्श लिया। मेडिसिन विभाग, बाल रोग विभाग व आर्थोपेडिक विभाग में मरीज अधिक रहे। वायरल इंफेक्शन के साथ उल्टी-दस्त के मरीजों को परामर्श दिया गया। गंभीर रोगियों को भर्ती किया गया।
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सी-आर्म मशीन खराब, 20 दिन से ऑपरेशन ठप
जिला अस्पताल में सी-आर्म मशीन खराब होने के चलते रोजाना पांच से छह मरीज बिना हड्डी ऑपरेशन के लौट जा रहे हैं। उन्हें चिकित्सक परामर्श तो एक रुपये के पर्चे पर दे दे रहे हैं, मगर ऑपरेशन न होने से मरीज या तो बाहर निजी सेंटर जा रहा है या फिर हॉयर सेंटर। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। 20 दिन बीतने के बाद भी मशीन न तो बन सकी न ही नई आई। इससे कथित दलाल ऐसे मरीजों को चिह्नित करके गुमराह करके निजी अस्पताल पहुंचा दे रहे हैं।
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चिल्ड्रेन वार्ड में 40 बच्चे भर्ती, बुखार व दस्त के अधिक
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में 24 बेड है। वर्तमान में 40 बच्चे भर्ती किए गए हैं। कुछ, बच्चे पीआईसीयू में हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने बताया कि उल्टी-दस्त, बुखार के मरीज अधिक हैं। बताया गया कि कई बच्चे हाईग्रेड फीवर वाले भी हैं। ब्लड सैंपल लेकर भेजा गया है।
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जिला अस्पताल के मोर्चरी में एक डीप फ्रीजर खराब
जिला अस्पताल में शवों को सुरक्षित रखने के लिए बने मोर्चरी में पहले दो डीप फ्रीजर के जरिये चार शव रखने की व्यवस्था थी। वर्तमान में एक खराब है। वहीं, एक डीप फ्रीजर दो ट्रे लगा है वह क्रियाशील है। इसमें दो शव रखने की सुविधा है। वर्तमान में ऐसे भी शव मोर्चरी में रखवा दिए जा रहे हैं, जो सीधे पोस्टमार्टम हाउस भेजना चाहिए। ऐसे में अज्ञात शव या फिर जिला अस्पताल में भर्ती के दौरान मृत दशा में उनके शव को रखने में परेशानी हो रही है। अज्ञात शवों को पहचान के लिए 72 घंटे मोर्चरी में रखने का प्रावधान है। एसआईसी जिला अस्पताल डॉ. खालिद रिजवान अहमद का कहना है कि एक डीप-फ्रीजर निष्क्रिय घोषित किया गया है। इंडेंट भेजा गया है।

तीमारदार बोले-
जिला अस्पताल का डिजिटल एक्स-रे खराब होने के चलते बाहर से छह से सात सौ रुपये खर्च कर एक्स-रे करवाना पड़ा। इसमें भी रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है। इससे ओपीडी से चिकित्सक उठ जा रहे हैं।

-सुरेंद्र शुक्ल, तीमारदार
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जिला अस्पताल में अव्यवस्था के बीच इलाज कराना मजबूरी है। डिजिटल के बजाय सामान्य एक्स-रे कराया जा रहा है, इससे जांच में परेशानी हो रही है। बाहर से जांच करवाने में अतिरिक्त भार पड़ रह है।
-नरेंद्र, तीमारदार
कोट
डिजिटल एक्स-रे मशीन मरम्मत के लिए कंपनी को पत्र लिखा गया था। कुछ पार्ट बनने शेष हैं, इसके बाद मशीन क्रियाशील कर दी जाएगी। सी-आर्म मशीन नई लगेगी, इसके लिए इंडेंट भेजा गया है। मोर्चरी में खराब डीप फ्रीजर बनवाया जाएगा।
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-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
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