बस्ती। जिले के एक भी कस्तूरबा विद्यालय अभी तक उच्चीकृत नहीं किए जा सके हैं। तीन साल पहले जनपद के 13 ब्लॉकों में संचालित जूनियर स्तर के कस्तूरबा विद्यालयों को इंटरमीडिएट तक अपग्रेड किया जाना था। इसके लिए प्रति विद्यालय भवन 1.75 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित हुआ। विडंबना यह है कि अभी तक एक भी उच्चीकृत कस्तूरबा विद्यालय संचालित नहीं हो सका। यहां तक कि जिन दस भवनों का निर्माण शुरू हुआ तीन साल बीतने के बाद इसमें से एक भी भवन विभाग को हस्तांतरित नहीं हो सके हैं।
शासन स्तर से आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय योजना को और प्रभावी बनाए जाने की कवायद छिड़ी। मगर इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। जिले के 14 में से 13 ब्लॉकों में कक्षा एक से आठ तक बालिकाओं के निशुल्क आवासीय सुविधा के साथ कस्तूरबा विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इसे उच्चीकृत कर 9 से 12 तक की छात्राओं को निशुल्क आवासीय सुविधा में पढ़ने का अवसर प्रदान किया जाना है। यह योजना लापरवाही की भेंट चढ़ी हुई है। हाईस्कूल एवं इंटर स्तर के कस्तूरबा भवनों का निर्माण ही अधर में लटका है। वह भी तब जबकि विभाग 13 में से तीन ब्लॉकों में नए कस्तूरबा भवनों के लिए जमीन ही नहीं तलाश सका है।
केवल दस ब्लॉकों में ही जमीन उपलब्ध हो सकी है। कार्यदायी एजेंसी अभी तक एक विद्यालय भवन का निर्माण पूरा नहीं करा सकी है, जिससे वर्तमान सत्र में भी नए कस्तूरबा विद्यालयों को संचालित नहीं किया जा सका है।
यूपी सिडको को मिली थी निर्माण की जिम्मेदारी
दस ब्लॉकों में हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बालिकाओं के लिए आवासीय सुविधा वाले भवन साज-सज्जा के साथ तैयार करने की जिम्मेदारी कार्यदायी एजेंसी यूपी सिडको को वर्ष 2019-20 में मिली थी। सभी जगहों पर भवन निर्माण की गति बेहद धीमी है। एक भी विद्यालय पूर्ण रूप से तैयार नहीं किए जा सके हैं। हर्रैया, विक्रमजोत, बस्ती सदर, बहादुरपुर, गौर, सल्टौआ एवं बनकटी में अभी भवन का निर्माण अधर में लटका है। इसके अलावा कुदरहा, कप्तानगंज और रुधौली में भवन के निर्माण पूर्ण बताए जा रहे हैं, लेकिन यहां छात्राओं के लिए कुर्सी, बेंच, बेड, बिस्तर आदि साज-सज्जा के कार्य अभी बाकी है, जिससे इन विद्यालयों का भी हस्तांतरण नहीं हो सका है।
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तीन ब्लॉकों में नहीं मिल पाई जमीन
जिले के रामनगर, परशुरामपुर और सांऊघाट ब्लॉक में नए कस्तूरबा भवन के लिए जमीन नहीं मिल सकी है। दरअसल इन भवनों के लिए जमीन की तलाश बेसिक शिक्षा विभाग के पूर्व से संचालित कस्तूरबा भवन या ब्लॉक संसाधन केंद्र के अगल-बगल ही की जा रही है। संबंधित ब्लॉकों के लिए चिह्नित स्थलों के इर्द-गिर्द प्रस्तावित जमीन के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई, जिससे इन जगहों पर नए कस्तूरबा विद्यालयों के संचालन की मंशा अधूरी रह गई।
छात्राओं को मिलेगी आवासीय सुविधा
नए कस्तूरबा विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को सिर्फ आवासीय सुविधा प्रदान की जानी है। प्रति विद्यालय संबंधित ब्लॉक क्षेत्र की सौ छात्राओं के रहने की व्यवस्था सुनिश्चित होनी है। इनका नामांकन नजदीकी क्षेत्र के माध्यमिक स्कूलों में विभाग द्वारा कराया जाएगा। पढ़ाई से लेकर रहने खाने तक की व्यवस्था निशुल्क रहेगी। ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को माध्यमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का सुअवसर मिल सके।
कार्यदायी एजेंसी यूपी सिडको को नए कस्तूरबा भवन पूर्ण किए जाने के लिए पत्र लिखा गया है। पूरी काेशिश है कि नए सत्र से बालिकाओं के इन छात्रावासों को संचालित किया जाए। जिन जगहों पर जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है उसके लिए भी प्रयास किया जा रहा है।
-अनूप कुमार, बीएसए।
नए कस्तूरबा भवनों का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। तीन भवन लगभग पूर्ण है। कुछ ही दिनों में यह हस्तांतरित करने योग्य हो जाएंगे। अन्य भवनों को भी शीघ्र तैयार करा दिया जाएगा।
-राधे मोहन लाल श्रीवास्तव, एक्सईएन, यूपी सिडको।