बस्ती। मौसम में बदलाव और बारिश के बाद सड़कों पर उड़ रही धूल से आंखों की परेशानी बढ़ गई है। जिला अस्पताल की नेत्र रोग ओपीडी में रोजाना करीब 120 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 15 मरीज एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और 20 से 30 मरीज धूल के कारण आंखों में जलन, चुभन, पानी आने और किरकिराहट की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी आंखों की समस्या वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।
बारिश के दौरान सड़कों पर जमा मिट्टी वाहनों के टायरों में चिपक जाती है। सड़क सूखने के बाद वाहनों की आवाजाही से यही मिट्टी बारीक धूल में बदलकर हवा में उड़ने लगती है। इससे राहगीरों, बाइक सवारों, दुकानदारों और सड़क किनारे रहने वाले लोगों को अधिक परेशानी हो रही है। धूल आंख में जाने से जलन और चुभन के साथ पानी आने तथा आंख में कुछ गड़ने जैसा महसूस हो रहा है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके यादव ने बताया कि बरसात के मौसम में एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के मरीज बढ़ जाते हैं। इसमें आंख लाल होने और खुजली की शिकायत होती है। मरीजों को आवश्यकता के अनुसार एलर्जी की ड्रॉप और दवा दी जाती है। धूल का कण आंख में जाने पर कॉर्निया में गड़ सकता है। समस्या बढ़ने पर चिकित्सकीय तरीके से उसे निकालना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि धूल से बचाव के लिए सड़क पर चलते समय चश्मा और बाइक चलाते समय हेलमेट का इस्तेमाल करना चाहिए। बाहर से घर लौटने पर आंखों को साफ पानी से धोना चाहिए। आंख में धूल या कोई कण चले जाने पर उसे रगड़ने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
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शनिवार को 1034 मरीजों की हुई जांच
जिला अस्पताल में शनिवार को कुल 1034 मरीजों की जांच की गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार आंखों से संबंधित बीमारियों की दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
समय से पहले कक्ष छोड़कर चले गए चिकित्सक
जिला अस्पताल में शनिवार को कुछ चिकित्सकों के निर्धारित समय से पहले कक्ष से चले जाने की बात भी सामने आई। दोपहर 1:08 बजे फिजिशियन कक्ष में डॉ. महेश की ड्यूटी थी, लेकिन वह मौजूद नहीं थे। उनके स्थान पर पीजी कोर्स कर रहे चिकित्सक डॉ. राजशेखर बैठे थे। मरीजों ने बताया कि संबंधित चिकित्सक के नहीं मिलने पर उन्हें लौटना पड़ा।दंत रोग विभाग में भी डॉ. सुभांगी मौजूद नहीं थीं। पूछताछ में उनके अवकाश पर होने की जानकारी दी गई। नाक, कान और गला रोग विभाग में भी करीब एक बजे चिकित्सक के कक्ष में मौजूद नहीं होने की बात सामने आई। कक्ष खुला था, लेकिन वहां कोई चिकित्सक या कर्मचारी नहीं था।
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बोले मरीज
सुबह 10 बजे अस्पताल पहुंची थी। पर्चा बनवाने के बाद फिजिशियन को दिखाया। उन्होंने अल्ट्रासाउंड लिखा। करीब दो घंटे तक जांच के लिए इंतजार करना पड़ा। जांच होने के बाद संबंधित चिकित्सक नहीं मिले तो दूसरे चिकित्सक को दिखाना पड़ा।
-सदरुन्निशा, डुमरियागंज
सुबह अस्पताल पहुंचकर पर्चा बनवाया और चिकित्सक को दिखाया। जांच के लिए अल्ट्रासाउंड कक्ष पहुंची तो काफी भीड़ थी। 11 बजे से खड़े-खड़े 12 बज गए, तब नंबर आया। जांच होने तक संबंधित चिकित्सक जा चुके थे। अब दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा।
-संभ्रांत, मालवीय रोड, बस्ती
कोट
जिला अस्पताल में आंखों से संबंधित बीमारियों की दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। धूल, मिट्टी और धूप से एलर्जी के मरीज अधिक आ रहे हैं। जिन चिकित्सकों की ड्यूटी थी, यदि वे निर्धारित समय से पहले कक्ष छोड़कर गए हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी और संबंधित से जवाब मांगा जाएगा।
-डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती