पहाड़ पर बर्फबारी, मैदानी इलाकों में लुढ़का पार
बस्ती। बर्फ से ढकी पहाड़ी को छूकर आ रही उत्तर पश्चिमी हवाओं से मैदानी इलाकों में तापमान गोते लगाने लगा है। बादल छा जाने और पूरे दिन ठंडी हवाओं के चलते तापमान नीचे गिर गया। सड़क पर विजिबिलिटी काफी कम रही। इससे वाहनों के आवागमन में परेशानी हुई। रोजमर्रा के घरेलू का कामकाज भी प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने रविवार-सोमवार तक पूर्वांचल का न्यूनतम तापमान 8-9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की अनुमान लगाया है। बृहस्पतिवार को न्यूनतम तापमान 10.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
अधिकतम तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस रहा। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि शनिवार को बादल छाए रहने का अनुमान है। उधर, फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि इन दिनों तापमान में कमी के चलते निमोनिया, कोल्ड डायरिया, सीने में दर्द, रक्तचाप में अनियमितता के कारण सांस फूलने, जकड़न आदि रोगों से लोग पीड़ित हो रहे हैं। ठंड से बचाव के लिए हमेशा मोटे और गर्म कपड़ों में रहना होगा। पानी हमेशा उबाल कर पीएं। धुएं और कोहरे से बचकर रहें। देर शाम या रात में बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। कमरे का तापमान बढ़ाने का उपाय करना बेहतर होगा।
‘फसलों की करें नियमित निगरानी’
कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरपी सिंह के मुताबिक मौसम में हो रहे बदलावों के कारण फसलों में कीटों और रोगों का प्रकोप इस समय बढ़ सकता है, इसलिए फसलों की नियमित निगरानी करते रहें। सब्जियों तथा अन्य फसलों में दीमक का प्रकोप पाया जा सकता है। इसकी रोकथाम के लिए सिंचाई के पानी के साथ क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी को चार मिली प्रति लीटर पानी के साथ घोलकर छिड़काव करें। बैंगन, फूल गोभी, टमाटर तथा प्याज आदि की रोपाई इन दिनों की जा सकती है। सरसों की फसल अगर 30-35 दिन की हो चुकी हो तो पहली सिंचाई शीघ्र करें और फसल में चितकबरे कीट की नियमित निगरानी करते रहें। गेहूं की 20-25 दिन की फसल में भी पहली सिंचाई देने का काम सम्पन्न करें। सिंचाई के तीन-चार दिन उर्वरक की शेष मात्रा का प्रयोग करें।