बस्ती। मौसम के अचानक करवट लेने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मंगलवार
को सुबह गलन बढ़ जाने से हिलते-कांपते बच्चे स्कूल पहुंचे। रेलवे स्टेशन
बस स्टैंड, जिला और महिला अस्पताल के बाहर लोग ठिठुरने को मजबूर रहे। घरों
और दुकानों पर लोग अलाव के सहारे समय बिताने को विवश हुए।
बदले
मौसम के कारण पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान में करीब पांच डिग्री
सेल्सियस की कमी आई है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार बुधवार को तापमान में
और भी गिरावट आ सकती है। वहीं अस्पतालों में सांस संबंधी रोगों के मरीजों
की संख्या भी बढ़ने लगी। रुक-रुक हो रही बारिश से लोग घरों में दुबके नजर
आए।
जिले में मंगलवार सुबह से ही बादल छाए रहे। दोपहर से बूंदाबांदी
का सिलसिला शुरू हुआ तो रात तक रिमझिम बारिश जारी रही। मौसम के इस बदले
रुख ने ठंडक बढ़ा दी है। आकाश में बदली छायी रही। रही सही कसर दोपहर में
बारिश ने पूरी कर दी। ठंड व बारिश के चलते स्कूलों में उपस्थिति कम रही।
वहीं
ऊनी कपड़ों के बाजार में दिख रही मंदी भी दूर हो गई। दिन में स्वेटर, शाल,
दस्ताने व ऊनी टोपी की लोगों ने खूब खरीदारी की। रात में चल रही मंद हवाओं
ने मंगलवार की सुबह गलन और बढ़ा दी थी। सुबह आकाश में बदली छाये रहने की
वजह से सूर्यदेव के पूरे दिन दर्शन नहीं हुआ। रही सही कसर दिन में बारह बजे
के करीब रिमझिम बारिश ने पूरी कर दी।
पूरे दिन बारिश की टिपटिप ने
मौसम के तेवर में और सर्दी ला दी। लोग बारिश से बचने की जतन करते रहे। दो
चार दिन पहले तक ठंड जाते देख जिन दुकानदारों व ब्रांडेड कपड़ों के शोरुम
में ऊनी कपड़े, जैकेट्स के दामों में कमी करते हुए ग्राहकों को आफर देकर
लुभा रहे थे, अचानक उन्होंने अपने पंफलेट्स छुपा कर रख दिए।
उनको
शायद अहसास हो गया कि अभी उनकी दुकानदारी का रंग कुछ और दिनों तक चटख
रहेगा। दिन में ब्रांडेड शोरूम में लोग ऊनी कपड़ों की खरीदारी में जुटे
रहे। वहीं सड़क पर फुटपाथ किनारे दुकान लगा कर स्वेटर, मफलर, दस्ताने, टोपी
बेचने वाले पन्नी तान कर बैठे रहे।
ठंड से बचने के लिए महिलाओं और
पुरुषों ने इन दुकानों पर जाकर अपनी पसंद के अनुरूप खरीदारी की। मौसम के
तेवर के चलते सरकारी व निजी स्कूलों में उपस्थिति कम रही। कुछ निजी स्कूलों
के प्रबंधकों ने बताया कि मौसम के चलते आज सुबह से ही उपस्थिति कम रही।
दिन
में बारिश के चलते स्कूल जल्द बंद कर बच्चों को घर भेज दिया गया। दिन में
गांधीनगर में कई दुकानों के सामने अलाव जलाकर लोग अपने को गर्म रखने की जतन
करते रहे। आग की लपटों को देख कर सड़क पर चलने वाले राहगीर भी आग सेंकने
में जुट गए।