मंगलवार को भीषण कोहरे के चलते सुबह 10 बजे तक लोग हेड लाइट जलाकर सफर को मजबूर हुए। दोपहर के करीब सूर्यदेव निकले जरूर लेकिन धूप में कोई दम नहीं था। गलन के साथ ठंड की जकड़न बनी रही। हालांकि महिलाएं कपड़े सूखाने के लिए छतों पर पहुंच गईं।
कोहरे के कारण पिछले तीन दिनों से धूप का न के बराबर थी। इस दौरान पारा भी लगातार लुढ़कता रहा है। सोमवार को अधिकतम तापमान 25 और न्यूनतम 11 था जो मंगलवार को घटकर क्रमश: 23 और 10 पर पहुंच गया। हवाओं की गति जरूर कम हुई जबकि आर्द्रता बढ़कर 72 पहुंच गई। तापमान में गिरावट रविवार से ही जारी है। गलन बढ़ने से फुल स्वेटर और कोट बाहर निकल आए हैं। गांव और कस्बों में विभिन्न स्थानों पर लोग अलाव के सामने डटे रहे। वहीं दोपहर बाद सूर्यदेव के दर्शन हुए तो महिलाएं घर के अंदर से निकलकर छतों पर पहुंच गईं। हालांकि धूप के न के बराबर होने के कारण कुछ देर बाद ही लोगों को घरों के अंदर कैद बोने पर मजहूर होना पड़ा।
डॉक्टरों ने लगातार लुढ़कते तापमान से सावधान रहने की बात कही है। बच्चे और बुजुर्गों के अलावा श्वास रोगियों के लिए यह मौसम घातक बताया है। उन्होंने थोड़ी भी परेशानी महसूस होने पर नजदीकी डॉक्टरों से इलाज की बात कही है। ठंड बढ़ने के साथ ही गर्म कपड़े की बिक्री ने भी बढ गई। दुकानों पर लोग ऊनी कपड़े आदि खरीदते नजर आए।