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कोडीनयुक्त कफ सिरप : पंकज तो सिर्फ मोहरा...मास्टरमाइंड कोई और

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बस्ती। पुलिस को 50 दिनों तक छकाने के बाद गिरफ्त में आया कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले में बोगस फर्म गणपति फार्मा के मालिक पंकज कुमार ने पुलिस की पूछताछ में कई राज उगले हैं। सूत्रों के मुताबिक पंकज मोहरा भर है, इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। उसने दो-तीन नाम भी बताएं हैं।
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इनमें कुछ स्थानीय तो कुछ वाराणसी के हैं। पुलिस अब उन तक पहुंचने का ताना-बाना बुन रही है। हालांकि, पुलिस इन पर हाथ डालने से पहले पुख्ता साक्ष्य जुटाने में लगी है, ताकि जब उन पर हाथ रखे तो किरकिरी न होने पाए। बृहस्पतिवार को पुलिस जब पत्रकारवार्ता में गणपति फार्मा के मालिक मूल रूप से वाराणसी के थाना आदमपुर के ए-3/134 त्रिलोचन बाजार निवासी पंकज कुमार की गिरफ्तार की जानकारी दे रही थी तो उसके चेहरे पर थोड़ी भी शिकन नहीं देखी गई।
वह इस बात से मुतमइन लग रहा था कि उसके आका जल्द जेल से बाहर करा देंगे। पत्रकारों ने उससे कई बार सच्चाई जानने की कोशिश की, लेकिन उसने मुंह तक नहीं खोला। उसके हाव-भाव बता रहे थे कि कोडीनयुक्त कफ सिरप के खेल के पीछे वह सिर्फ मोहरा भर है, जिसे आगे कर इतना बड़ा खेल खेला गया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि गणपति फार्मा का लिखा-पढ़ी में असली मालिक पंकज कुमार ही है। बैंक खाते की छानबीन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी यही सबूत दे रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक पुलिस की पूछताछ में गणपति फार्मा के मालिक ने यह कबूल किया है कि इस काले धंधे में दो-तीन लोग उसके साथ शामिल हैं। उसने वाराणसी से लेकर स्थानीय धंधेबाज के नाम भी बताए हैं। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया है कि फर्म खोलने के लिए उससे सिर्फ कागजात की मांग की गई थी। बदले में मोटी रकम देने की बात कही गई थी। लालच में आकर उसने कागजात उपलब्ध करा दिए गए थे। गणपति फार्मा से कोडीनयुक्त कफ सिरप कहां-कहां भेजे गए, इस बात की उसे जानकारी नहीं है। वह बस्ती तब आता था, जब फर्म का कोई जरूरी काम पड़ता था। बाकी काम वही दो-तीन लोग संभालते थे।
उधर, पंकज के पुलिस के गिरफ्त में आने के बाद स्थानीय धंधेबाजों के होश उड़े हुए हैं। उन्होंने बचाव के लिए भाग-दौड़ शुरू कर दी है। सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण तिवारी का कहना है कि कोई कितना भी पहुंच वाला क्यों न हो, सबूत मिलने पर वह सलाखों के पीछे होगा। ब्यूरो
बस्ती से नेपाल तक की गई थी कोडीनयुक्त कप सिरप की सप्लाई : कोडीनयुक्त कफ सिरप के काले धंधे की नींव लॉकडाउन के दौरान ही पड़ गई थी। उस समय शराब बंदी थी तो लोगों ने इसे विकल्प के रूप में चुन लिया। इसके बाद यह धंधा परवान चढ़ता गया। इससे बस्ती भी अछूता नहीं रहा। धीरे-धीरे इस काले धंधे का बस्ती भी हब बन गया। सूत्रों के मुताबिक नेपाल हिंसा से पहले बस्ती से कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़ी खेप वहां भेजी गई थी। हालांकि, पुलिस के आला अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। कोडीनयुक्त कफ सिरप के धंधेबाजों पर ईडी की छापेमारी के बाद यहां की पुलिस ने भी जांच तेज कर दी थी।
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