बस्ती। मौसम परिवर्तन से सांस के मरीज बढ़ गए हैं। सांस के साथ पुराने त्वचा रोगियों की दिक्कत बढ़ी गई है। मरीजों में अस्थमा, एलर्जी और त्वचा के पुराने मामले उभर रहे हैं। चेस्ट और मेडिसिन विभाग में भी भीड़ उमड़ी रही है। वार्ड फुल हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि उमस के साथ दिन-रात के तापमान में अंतर और धूल दमा रोगियों की मुश्किलें बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना ऐसे 15 से 20 मरीज आ रहे हैं। उन्हें भर्ती करके ऑक्सीजन लगाना पड़ रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक, दमा रोगियों की सांस नलियों में सिकुड़न और सूजन से परेशानी बढ़ गई है। मौसम में बदलाव का असर सेहत पर पड़ रह है। दिनों दिन हवा की गुणवत्ता भी खराब होती जा रही है।
धूल के कण हवा में घूल रहे हैं। इससे मौसम सांस के मरीजों के लिए समस्या बढ़ गई है। चेस्ट विभाग में मरीज पहुंच रहे, इससे मेडिकल वार्ड फुल हो गया है। इधर, दमा रोगियों की संख्या भी अस्पताल में बढ़ गई है। पहले पांच से छह ही मरीज आते थे। अब सांस से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिला अस्पताल में बच्चों को नेबुलाइजर की जरूरत पड़ रही है।
मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. बीएल कन्नौजिया ने बताया कि सुबह-शाम और दोपहर में धूप खिलने से मौसम गर्म हो जाता है। धूल के कण सांस के जरिए फेफड़े तक पहुंच जाते हैं। अस्थमा के मरीजों की सांस की नलियां संवेदनशील होती हैं। परेशानी बढ़ने पर दमा रोगियों का ऑक्सीजन लेवल कम होने लगता है। जिला अस्पताल में डॉ. शैलेश का कहना है कि फेफड़े में संक्रमण भी पाया जा रहा है। ऐसे रोगियों को ऑक्सीजन पर रखना पड़ रहा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि जिन सांस की परेशानी वाले बच्चों की इस सीजन में दिक्कत बढ़ गई है। सुबह मौसम में नमी होने की वजह से वायरल रोगी भी बढ़ गए हैं। इन मरीजों की भी सांस तेज चलने लगती है। प्रतिदिन आठ से 10 मरीज भर्ती हो रहे हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम अनुग्रह ने बताया कि खुजली के साथ पुराने रोग उभर गए हैं। चक्कते के साथ दाने निकल रहे। तीन से चार माह में ऐसे रोगियों को ठीक होने में लग जाते हैं। बारिश में बार-बार भीगने और गीला कपड़ा पहनने से भी दिक्कतें आती है।
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इन बातों का रखें ख्याल
अस्थमा का अटैक आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
सांस रोगी दवा की पर्याप्त खुराक लें।
इनहेलर साथ रखें, नियमित उपयोग करें।
धूल आदि होने पर मास्क लगाएं।
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ऐसे करें बचाव
पैदल चलें, नियमित योग करें।
शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
मौसमी फलों का सेवन करें।