संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। चाइनीज लहसुन का धंधा जिले सब्जी के साथ कम, किराने के सामान के साथ ज्यादा फल-फूल रहा है। गोरखपुर मंडी से किराने के सामान की गाड़ी में इसकी बोरियां छिपाकर लाई जा रही हैं। धर-पकड़ से बचने के लिए गाड़ी में किराने के सामान के बीच 10-15 बोरी छिपाकर इसे लाया जा रहा है।
किराने के सामान के साथ फुटकर दुकानदारों को कस्बों तक पहुंचाया जा रहा है। शहर के गांधीनगर, कचहरी, स्टेशन रोड की मंडी में चाइनीज लहसुन दिखाई नहीं देगा। मगर, मांग करने पर दुकानदार उपलब्ध कराने के लिए तैयार हो जाते हैं। बोलते हैं कि जब से जांच-पड़ताल होने लगी है, तब से इसे छिपा कर रखने लगे हैं। ऑर्डर करने पर माल पहुंचाने की हामी भर लेते हैं।
सब्जी मंडी में मंगलवार को नाम मात्र लहसुन दिखा। नाम न छापने की शर्त पर एक थोक व्यापारी ने बताया कि गोरखपुर मंडी से यहां किराने की मंडी में चाइनीज लहसुन लाई जा रही है, जिसे किराने के सामान के साथ कस्बों में पहुंचाया जाता है। देखने में सुडौल और साफ-सुथरा होने के कारण कस्बों में ग्रामीण इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंट वाले भी इसे खरीद रहे हैं। कारण यह कि देसी लहसुन से यह सस्ता और छीलने में आसानी होती है। चूंकि इनके किचन ग्राहकों की नजर से छिपे होते हैं, इसलिए बेरोकटोक चाइनीज लहसुन खप रहा है।
सब्जी मंडी के थोक लहसुन व्यवसायी मो. अय्यूब बताते हैं कि जब से चाइनीज लहसुन ने बाजार में दखल दी है, तब से व्यवसाय एक तिहाई कम हो गया है। पहले वह 25 क्विंटल देसी लहसुन मंगाते थे, जो तीन-चार दिन में बिक जाता है। अब 10 क्विंटल मंगाते हैं। मगर, उसे बिकने में एक सप्ताह लग जाते हैं।
मंडी में तीन सौ, फुटकर चार सौ रुपये देसी का भाव ः मंडी और फुटकर के रेट में भारी अंतर की वजह से भी चाइनीज लहसुन को बढ़ावा मिल रहा है।
देसी लहसुन मंडी में तीन सौ रुपये किलो है। फुटकर दुकानों पर चार से साढ़े चार सौ रुपये लिए जा रहे हैं। चाइनीज लहसुन फुटकर में तीन सौ रुपये तक बिक रहा है।