बस्ती। मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में वायरल संक्रमण, बुखार और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती मरीजों की संख्या क्षमता से अधिक पहुंच गई है। 24 बेड वाले वार्ड में सोमवार को 25 बच्चे भर्ती थे। वहीं, पीआईसीयू में हाईग्रेड फीवर और झटके की शिकायत वाले पांच बच्चों का उपचार चल रहा था।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह ने बताया कि बीते सप्ताह तापमान में काफी उतार-चढ़ाव हुआ है। गर्मी के बाद बारिश से तापमान कम होने के कारण अस्थमा से पीड़ित बच्चों को सांस लेने में परेशानी बढ़ी है। शिशुओं में निमोनिया के लक्षण के साथ दस्त की शिकायत भी सामने आ रही है। गंभीर स्थिति वाले बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों करीब 150 बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें 100 से अधिक बच्चों में बुखार की शिकायत मिल रही है। पहले 130 से 140 बच्चे ओपीडी में आते थे, जिनमें करीब 40 से 50 बच्चों को ही बुखार की शिकायत रहती थी। दूषित पानी के कारण दस्त के मरीज भी बढ़े हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल के अनुसार, वायरल फीवर के साथ अस्थमा और सांस संबंधी समस्या वाले बच्चे भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। तेज खांसी और सांस लेने में परेशानी वाले कुछ बच्चों को भर्ती कर ऑक्सीजन दी जा रही है। एक ही बेड पर दो बच्चे भर्ती होने की स्थिति भी बनी हुई है। कई बच्चों को छह दिन से बुखार बना हुआ है।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम अनुग्रह ने बताया कि बारिश के बाद नमी बढ़ने से फंगल संक्रमण और खुजली के मरीज भी बढ़े हैं। पहले त्वचा रोग की ओपीडी में करीब 170 मरीज आते थे, अब यह संख्या 200 के आसपास पहुंच गई है।
सोमवार को जिला अस्पताल में कुल 1134 मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। इनमें मेडिसिन, बाल रोग, ईएनटी और त्वचा रोग विभाग में मरीजों की संख्या अधिक रही।
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इन बातों का रखें ध्यान
बीपी और ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रखें।
पुरानी बीमारियों की दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद न करें।
ठंडी सामग्री खाने-पीने से बचें।
गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करें।
सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
कोट
जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को समय से चिकित्सकीय परामर्श और दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मरीजों की जांच आसानी से हो सके, इसके लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है।
-डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती